युवाओं को रोजगार से जोड़कर बनायेंगे मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को वाईब्रेंट

  भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि युवाओं को कौशल देकर उन्हें रोजगार से जोड़कर मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को वाइब्रेंट बनाया जायेगा। प्रदेश में आई.टी.आई. को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जायेगा। रोजगार कार्यालयों को बहुउद्देशीय बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां लाल परेड ग्राउंड में आयोजित स्किल समिट में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री वैंकैया नायडू विशेष रूप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आगामी मई अंत तक प्रदेश की हर गांव में 24 घंटे बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश के गांव-गांव में लघु उद्योग शुरू होगा। आज हर बड़ा उद्योग समूह प्रदेश में आ रहा है। इससे रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे। इन उद्योगों में 50 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। राज्य सरकार ने तय किया है कि 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने वाले नये उद्योगों को विशेष पैकेज दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह स्किल समिट मध्यप्रदेश के विकास का महायज्ञ है। हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश में देश का अग्रणी राज्य बनायेंगे। पिछले 9 सालों में सिंचाई क्षमता 7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 21 लाख हेक्टेयर की गई है। इस साल इसे बढ़ाकर 25 लाख हेक्टेयर किया जायेगा। आज मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन करने वाले राज्य है। नर्मदा का जल अब क्षिप्रा, कालीसिंध, गंभीर और पार्वती नदी में डालकर नदी जोड़ो परियोजना को मूर्त रूप दिया जायेगा। इससे करीब 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट मिशन युवाओं को रोजगार और उद्योगों के लिये प्रशिक्षित करने का अभियान है। हमारे युवाओं को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जायेगा कि वे दुनिया के किसी भी कोने में जाकर रोजगार कर सकें। युवा खुद अपना उद्योग शुरू करें इसके लिये मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना बनाई गई है। इसमें 25 लाख रूपये तक के ऋण की गारंटी तथा 5 वर्ष तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान राज्य सरकार देगी। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे प्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में योगदान देने का संकल्प लें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम में घोषणा की कि प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में तकनीकी प्रशिक्षण के लिये आई.टी.आई. या कौशल विकास केन्द्र होगा। अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल विकासखंडों में 47 कौशल विकास केन्द्र, विशेष पिछड़ी जातियों के लिये विशेष कौशल विकास केन्द्र खोले जायेंगे। कृषि विभाग अलग से 5 कौशल विकास केन्द्र शुरू करेगा। कृषि के क्षेत्र में युवाओं को 20 विधाओं में प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रदेश सरकार के 25 विभाग कौशल विकास मिशन चलायेंगे। लघु और मध्यम उद्योगों में गुणवत्तापूर्ण संसाधन और उपकरणों के लिये भोपाल, जबलपुर और सतना में टूल रूम स्थापित किये जायेंगे। आई.टी.आई. और पॉलीटेक्निक से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिये 4 फिनिशिंग स्कूल शुरू किये जायेंगे। रोजगार कार्यालयों को बहुउद्देशीय बनाया जायेगा। ये केरियर मार्गदर्शन और प्लसमेंट का काम करेंगे तथा रोजगार मेले आयोजित करेंगे। बैतूल और धार की तरह अन्य जेलों में महिला बंदियों के लिये कौशल विकास केन्द्र खोले जायेंगे। एक सौ दस महाविद्यालयों और एक सौ पचास स्कूलों में कक्षा के बाद वोकेशनल ट्रेनिंग दी जायेगी। आई.टी.आई. को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जायेगा। हर आई.टी.आई. में प्लेसमेंट सेल और कम्प्यूटर लेब होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति में वृद्धि की जायेगी। शिष्यवृत्ति-छात्रवृत्ति वितरण को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लाया जायेगा। गांवों में रहने वाले कारीगरों के लिये कौशल दक्षता प्रमाणीकरण की प्रणाली विकसित की जायेगी। ग्लोबल स्किल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिये मध्यप्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा। आई.टी.आई और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, लेंग्वेज लैब और वाई.फाई की सुविधा होगी। कौशल विकास प्रशिक्षण का ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया जायेगा। करीब 50 करोड़ रूपये की लागत से मल्टी स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जायेगा। पॉलीटेक्निक कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप बदलाव किये जायेंगे।

कौशल विकास में मध्यप्रदेश बना देश के लिये मार्गदर्शी

पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री एम वैंकया नायडू ने कहा कि भारतीय नागरिकों में कला कौशल और बुद्धिमता की कमी नहीं है। भारतीयों ने ही विकसित देशों में अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बनाई है। उन्होने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से रोजगार देने के अभियान में आम लोगों सहित उद्योग समूहों की भी भागीदारी होना चाहिये। उन्होने उद्योगों का आव्हान किया कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ इस काम में भागीदार बनें।

श्री नायडू ने कहा कि कौशल विकास पर पूरा ध्यान देकर युवाओं को रोजगार से जोडने की कार्ययोजना बनाने में मध्यप्रदेश देश के लिये मार्गदर्शी बन गया है। उन्होने कहा कि कौशल विकास के लिये बजट प्रावधान बढाया जाना चाहिये। श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल की तारीफ करते हुए श्री नायडू ने कहा कि श्री चौहान प्रतिभा, चरित्र, आचरण और क्षमता के धनी हैं। वे सही अर्थ में भारतीय राजनीति के उभरते हुए सितारे हैं।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत पुरातन देश है जहां उपलब्ध समृद्ध ज्ञान प्राप्त करने विदेशों से भी लोग आते थे। उन्होने कहा कि भारत में विश्व गुरू बनने की क्षमता है। उन्होने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ने से प्रगति की रफतार तेज हुई। उन्होने कहा कि भारत की प्रगति के लिये मध्य भारत की प्रगति जरूरी है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान विकास का एकमात्र उद्देश्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

श्री नायडू ने मध्यप्रदेश की प्रगति और अभूतपूर्व उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि आज देश की ओर से मध्यप्रदेश को सलामी देना चाहिये। श्री नायडू ने कहा विकास के लिये बिजली चाहिये और मध्यप्रदेश ने गांवों को बिजली उपलब्ध कराने का काम शुरू कर बड़ा काम किया है। खेती को इसका लाभ होगा। उन्होने कहा कि भारत में एक करोड़ तीस लाख लोग हर साल बेरोजगारों की सूची में जुड़ जाते है। इस स्थिति को दूर करने के लिये निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कौशल विकास ही सही अर्थ में रोजगार है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने देश और प्रदेश में कौशल सम्पन्न जनशक्ति की आवश्कता की चर्चा करते हुए कहा कि 2030 तक देश में पांच करोड युवाओं को कौशल सम्पन्न बनाने की जरूरत होगी। उन्होने कहा कि अगले दो सालों में 15 लाख और पांच सालों में 48 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होने कहा कि कौशल विकास मिशन को प्रदेश के प्रयासों से गति मिलेगी और मध्यप्रदेश के कौशल सम्पन्न युवाओं द्वारा तैयार उत्पादों से न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश के बाजारो में मध्यप्रदेश की उपस्थिति होगी।

भारतीय उद्योग परिसंघ के पश्चिम क्षेत्र के उपाध्यक्ष श्री आर. मुकुंदन ने कहा कि परिसंघ समर्थित उद्योग इकाइयों और समूहों द्वारा प्रदेश में 13 आईटीआई संचालित की जा रही हैं और ग्यारह नये ट्रेड शुरू किये गये हैं। उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश में सबसे अच्छी बात यह है कि यहां से 1.5 लाख कौशल सम्पन्न जनशक्ति हर साल प्रशिक्षित होकर निकलती है जो उद्योगों के लिये सहायक साबित होगी। उन्होंने कहा कि और अधिक संख्या में कौशल विकास केन्द्र खोले जायेंगे।

राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के उपाध्यक्ष श्री जय कांत सिंह ने कहा कि आज भारत और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में उपलब्ध कौशल को पहचाने की जरूरत है। उन्होने मध्यप्रदेश के प्रयास को कौशल का कुंभ बताते हुए हुए कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन मध्यप्रदेश के साथ पूरा सहयोग करेगा।

उल्लेखनीय है कि तकनीकी संस्थाओं के प्रशिक्षित 1600 युवाओं को विभिन्न कंपनियों और उद्योग समूहों में नियुक्ति मिली है। मुख्यमंत्री ने प्रतीक स्वरूप कुछ युवाओं को मंच पर ससम्मान आमंत्रित कर नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर आईटीआई में विभिन्न ट्रेड में सर्वाधिक नंबर से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को पुरस्कार स्वरूप एक हजार रूपये और प्रशंसा पत्र प्रदान किये।

इस अवसर पर कौशल विकास के लिये आटोमेटिव स्किल डेव्हलपमेंट काउंसिल, एग्रीकल्चर स्किल डेव्हलपमेंट काउंसिल और सिक्यूरिटी स्किल डेव्हलपमेंट काउंसिल के राज्य सरकार के साथ करारनामे हुए।

चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री महेन्द्र हार्डिया ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर सहकारिता मंत्री श्री गौरी शंकर बिसेन, गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री एवं भोपाल के सांसद श्री कैलाश जोशी, मुख्य सचिव श्री आर परशुराम, अपर मुख्य सचित तकनीकी शिक्षा श्रीमती अजिता वाजपेयी पाण्डे और बड़ी संख्या में प्रदेश के विभिन्न जिलों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों से आये युवा उपस्थित थे। पूर्व में मुख्यमंत्री ने विभिन्न तकनीकी शिक्षण संस्थानों, कौशल विकास के संबंध में नये ट्रेड और रोजगार की जानकारी देने वाली संस्थाओं के स्टाल का निरीक्षण किया।

प्रादेशिक

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