इटारसी ! शहर को खाकी वर्दी का डर तो है, लेकिन सिर्फ आमजन में, अपराधियों में नहीं। पुलिस विश्वास खोते जा रही है। पुलिस अपराधियों से व्यवहार बनाकर रखती है और आमजन से ठीक से बात तक नहीं करती। कुछ इस तरह के मुद्दे रविवार को हुये संवाद कार्यक्रम में निकलकर सामने आये। मौका था जिला पुलिस अधीक्षक आशुतोष सिंह से सीधी बात करने का।
पत्रकार भवन में हुए प्राइ्रवेट स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले संवाद कार्यक्रम में जहां स्कूल व कोचिंग संचालकों और समाजसेवी संगठनों ने पुलिस से सीधे बात करते हुये वर्तमान में पुलिस की क्या छवि है और पुलिस आम लोगों से किस तरह का व्यवहार करती हैं, अगर समाज को अपराध मुक्त बनाना है तो पुलिस को क्या करना चाहिए, जैसे कुछ मुद्दों पर सभी ने अपनी बात रखी। सभी की बातें सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक ने आखिर ये मान ही लिया कि व्यवहारिकता में पुलिस पीछे है। हालांकि पुलिस के बचाव में एसपी श्री सिंह ने कहा कि आमतौर पर लोग अपने बच्चों पर आंख बंद करके भरोसा कर लेेते है। वे अपने बच्चों की गलती स्वीकार नहीं करते। बच्चों को इतनी आजादी भी नहीं दी जानी चाहिए कि वे बेलगाम हो जाएं। आजकल सबके पास स्मार्टफोन है, सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रखी जानी चाहिए। कई बार पेरेन्ट्स को पता ही नहीं होता और बच्चें के पास मोबाइल होता है। सीधे संवाद कार्यक्रम में गुरूनानक स्कूल के संरक्षक जसपाल सिंह भाटिया ने कहा कि ऐसा नहीं कि पुलिस अपराधियों में अपना भय पैदा नहीं कर सकती। बस अधिकारी पर निर्भर करता है कि शहर में कैसा माहौल बनाना हैं। कोचिंग व स्कूल संचालकों ने ये कहा कि कोचिंग व स्कूल के बाहर आवारा व असामाजिक तत्वों का जमावाड़ा लगा है, पुलिस अगर इन क्षेत्रों में एक-दो राउंड लगाते रहे तो असामाजिक तत्वों का घूमना बंद हो जायेगा। इस संबंध में श्री भाटिया ने कहा कि कोचिंग व स्कूल संचालकों को इनसे निपटने खुद हिम्मत जुटानी होगी साथ ही छात्र-छात्राओं को इनसे निपटने जागरूक करना होगा।
समाजसेवी दीप्ति कोठारी ने एसपी को सुझाव देते हुये कहा कि स्कूलों, कॉलेजों में और एसपी कार्यालय में एक शिकायत पेटी लगाई जाये, ताकि जो व्यक्ति सीधे तौर पर पुलिस से शिकायत नहीं कर सकता वह शिकायत पेटी में अपनी शिकायत दे सके। क्योंकि निचले स्तर पुलिस से लोगों का भरोसा उठते जा रहा है। श्रीमति कोठारी ने कहा कि शहर को कोतवाली में चरित्र प्रमाण पत्र के नाम पर तो रिश्वत का खेल चल रहा है, उस और ध्यान दिलाते हुये कहा है कि रिश्वत खाने वाले के खिलाफ भी आप कार्यवाही करें।
स्कूल संचालक आलोक गिरोटिया ने कहा कि आम लोग पुलिस से डरते है। समय-समय पर पुलिस को संवाद कार्यक्रम का आम लोगों से चर्चा करनी चाहिये ताक आम लोगों में पुलिस का डर खत्म हो और वे जागरूकता के साथ अपराध रोकने में पुलिस के साथ खड़े रहे। जेएम कम्प्यूटर संचालक मनीता सिद्दीकी ने दो दिन पूर्व हुई छात्रा के हत्या के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही पर सवाल उठाते हुये कहा कि पुलिस ने पूरे मामले में मात्र एक ही को आरोपी बनाया है। जबकि जो घटनाक्रम हुआ है उससे ऐसा नही लगता कि पूरी वारदात को एक ही व्यक्ति अंजाम दिया है। इस संबंध में एसपी श्री सिंह ने कहा कि पुलिस ने अपनी कार्यवाही पूरी ईमानदारी से की है, हालांकि इस बात को लेकर आईजी और डीजी साहब भी यही मान रहे है कि घटना में दो से ज्यादा लोगों का हाथ है, लेकिन ऐसा नही है। लायंनेस क्लब के सदस्य शीतल तिवारी ने कहा कि पुलिस को हर क्षेत्र में मोबाइल नंबर दीवार पर लिखवाना चाहिये ताकि कही भी अपराध हो तो पुलिस को फोन पर सूचना दे सकें। श्रीमति तिवारी ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुये कहा कि किसी भी मामले में कोई भी गवाह पुलिस के लचर रवैये के चलते अपराधी से डरता रहता है और जब गवाही की बात आती है तो वह सही बात नहीं बोलता है, जिससे अपराधी बरी हो जाता है, तो पुलिस को ऐसा कुछ करना चाहिये कि गवाह का पुलिस पर विश्वास बना रहे। प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष शिव भारद्वाज ने कहा कि हर व्यक्ति की एफआईआर लिखी जानी चाहिए। उस पर तत्काल कार्यवाही होनी चाहिए तथा एसपी को सप्ताह में एक बार यहां समीक्षा करनी चाहिए, तभी व्यवस्था में सुधार होगा। संवाद कार्यक्रम में इनके अलावा लायंस क्लब की कीर्ति दुबे, हेमा पुरोहित, संजय अग्रवाल, संदीप तिवारी, प्रशांत जैन, साधना सहगल, इंदू चौरसिया ने भी अपनी बाते रखी।

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