इंदौर। मध्यप्रदेश की संस्कार नगरी इंदौर में दिगंबर जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज का 20 साल बाद एक बार फिर आना तय हो गया है। वे करीब दो माह के लिए आएंगे। इस दौरान आठ मंदिरों के पंच कल्याणक में शामिल होंगे। उनकी प्रेरणा से 20 साल पहले ज्ञानोदय विद्यापीठ रेवती रेंज में शुरू हुए कार्यों को गति मिलेगी। आचार्यश्री के संघस्थ ब्रह्मचारी सुनील भैया का कहना है कि रविवार को उनका सतवास से लोहरदा होते हुए इंदौर के लिए प्रवेश होगा। इसमें करीब 4 से 5 दिन का समय लगेगा। उनका मंगल प्रवेश जुलूस उदय नगर जैन मंदिर से निकालने की योजना है। इस दौरान उनके सान्निध्य में कई मंदिरों में पंच कल्याणक आयोजन में शामिल होंगे। इससे पहले वे गोम्मटगिरि में 1999 में चातुर्मास के लिए आए थे। तब अटल बिहारी वाजपेयी भी उनके दर्शन के लिए इंदौर आए थे।

आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से 20 साल पहले रेवती रेंज में साढे 27 एकड जमीन पर शुरू हुए प्रतिभा स्थली (ज्ञानोदय विद्यापीठ) के कार्यों को आचार्य के आने से गति मिलेगी। वर्तमान में अभी इस स्थान पर जहां गोशाला का संचालन किया जा रहा है, वहीं अतिथि निवास के 37 कमरे और दो बडे हॉल का निर्माण किया जा चुका है और 900 वर्गफीट जमीन पर संत निवास का निर्माण अंतिम चरण में है। इसके अलावा मंदिर के छात्रावास, हॉस्टल बिल्डिंग और महाविद्यालय के कार्यों में भी तेजी आएगी। आचार्य के आगमन की सूचना से प्रतिभा स्थली का संचालन करने वाले दयोदय चौरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट में हर्ष व्याप्त है। अध्यक्ष सुंदरलाल जैन ने बताया कि 20 साल पहले आचार्य इंदौर आए थे। उनके आगमन के बाद उनकी प्रेरणा से ट्रस्ट का गठन कर 1999 में साढे 27 एकड जमीन रेवती रेंज में खरीदी गई थी। तभी से यहां विभिन्न सेवा कार्य किए जा रहे हैं। कोषाध्यक्ष कमल अग्रवाल का कहना है कि अतिथि निवास के 37 कमरे और दो हॉल 11 हजार वर्गफीट में बन चुके हैं। आचार्य के पुनः मां अहिल्याबाई की नगरी में प्रवास से कई योजनाएं पल्लवित होंगी।

दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष नरेंद्र वेद और युवा प्रकोष्ठ के राहुल सेठी ने बताया कि आचार्य के साथ 38 पिच्छियां (संत) हैं। इनमें मुनि प्रमाण सागर, मुनि समता सागर, मुनि अजीतसागर आदि शामिल हैं।

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