ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर हाईकोर्ट की युगलपीठ में ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन उपस्थित हुए। उन्होंने पालन प्रतिवेदन में 8 डिजिट का मोबाइल नंबर पेश किए जाने पर माफी मांगी। उन्होंने तर्क दिया कि गलती करने वाले कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और उनके ऊपर के अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया है। न्यायालय ने इस तर्क को सुनने के बाद कहा कि नगर निगम को लोगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। अगर कोई कर्मचारी गलती करता है तो उसके खिलाफ बर्खास्तगी जैसा कदम उठाना चाहिए। इससे दूसरे भी गलती करने से डरते हैं और जिम्मेदारी से काम करते हैं। निलंबन करने पर तो उसे आधी वेतन मिलती है। इससे उसे कोई फर्क नहीं पडता। आयुक्त ने कहा कि बर्खास्तगी भी करेंगे। न्यायालय ने आयुक्त को हाजिरी माफी दे दी।
अवधेश सिंह भदौरिया ने ग्वालियर हाईकोर्ट में डेंगू व मलेरिया को लेकर एक जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि बारिश का मौसम आ गया है। शहर मौसमी बीमारियों की चपेट में आ जाता है। शहर मलेरिया और डेंगू सबसे ज्यादा फैलता है। नगर निगम की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। इस दिशा में कार्य करने के लिए निर्देशित किया जाए। निगम ने तर्क दिया है कि मलेरिया विभाग ने करीब 200 संवेदनशील क्षेत्रों की सूची दी थी। उसके आधार पर दवा व फोगिंग की जा रही है। अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है, जहां भी छिडकाव कराते हैं, वहां के लोगों फीडबैक लेकर आते हैं। साथ में मोबाइल नंबर भी लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा मौसमी बीमारियों पर रोकने के लिए मलेरिया विभाग को पत्र लिखा है और संयुक्त अभियान चलाने को कहा है।
न्यायालय ने इस रिपोर्ट को पडा था। फीडबैक के कॉलम में 8 डिजिट का मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा- क्या मोबाइल नंबर 8 डिजिट का होता है। इस पर फोन लग सकता है तो फीडबैक लेकर दिखाएं। रिपोर्ट में गडबडी दिख रही है, इसलिए स्पष्टीकरण के साथ आयुक्त को तलब कर लिया था। गुरुवार को निगमायुक्त स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित हुए। 8 डिजिट के नंबर के बारे में उन्होंने बताया कि कर्मचारी द्वारा आखिरी के दो नंबर लिखना रह गए थे। जिस मोहल्ले में छिडकाव किया था, वहां उस व्यक्ति को तलाश किया। व्यक्ति भी मिल गया और उसका मोबाइल नंबर के दो डिजिट 20 रह गया था, अब नंबर भी सही हो गया है।
पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट में काफी कमियां थीं। इस वजह से स्वच्छता निरीक्षक किशोर सिंह चौहान, कृष्ण शर्मा, गौरव सेन, अजय सिंह ठाकुर, भीष्म पमानानी की वेतन वृद्धि रोकने के लिए नोटिस दिया और उनसे जवाब मांगा है। पालन प्रतिवेदन में कमियों के लिए इन्हें दोषी माना है।
उप स्वास्थ्य पर्यवेक्षक शरण कुमार, बीरेन्द्र करोसिया व भृत्य मोतीराम पाल को निलंबित किया है। पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट में गलत नंबर जाने के लिए दोषी माना गया है।
नगर निगम ने तर्क दिया कि पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश करने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार दी है। कोर्ट में तर्क दिया कि अब गलती नहीं होगी।
