ग्वालियर। मध्यप्रदेश की ग्वालियर एसटीएफ ने भिण्ड जिले के लहार में 19 जुलाई को सिंथेटिक दूध का कारोबार करने वाले डेयरी और चिलर सेंटर को सील किया था। एसटीएफ ने इनके रिकॉर्ड की जांच शुरू की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इनके रिकॉर्ड के मुताबिक इन चिलर सेंटर और डेयरी पर हर रोज जितनी मात्रा में दूध की आवक नहीं है, उससे ज्यादा दूध उन्होंने अपने यहां से सप्लाई होना दर्शाया है। इससे साबित होता है कि ये सिंथेटिक दूध बना रहे थे, जिससे बडा हुआ दूध सप्लाई कर पाते थे। इसी प्रकार इनके रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि उन्होंने ग्रामीणों से दूध खरीदा तो 40 रुपए प्रति लीटर के मान से हैं लेकिन फैक्टरियों को वही दूध 35 रुपए लीटर में बेचा गया है।
ऐसे में सवाल यह है कि महंगा दूध खरीदकर सस्ता बेचने से इन्हें क्या फायदा होगा। एसटीएफ के अफसरों का मानना है कि सिंथेटिक दूध बनाकर बेचने के कारण ही यह फैक्टरियों को कम दाम पर दूध बेच पा रहे थे। हालांकि एसटीएफ की टीम इस रिकॉर्ड की जांच करने में जुटी हुई है। इसके अलावा चिलर सेंटर और डेयरी संचालक को गिरफ्तार करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
ग्वालियर एसटीएफ के टीआई चेतन बैस ने बताया कि भिण्ड के लहार की डेयरी व चिलर से हमने जो रिकॉर्ड जब्त किया है, उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। वे कम मात्रा में दूध खरीदकर अधिक मात्रा में सप्लाई करते थे। इसी प्रकार अधिक दाम में खरीदा हुआ दूध कम दाम में बेचते थे, जिससे साफ है कि वे सिंथेटिक दूध बना रहे थे। हमने उनके यहां के सैंपल भी फूड सेफ्टी टीम से ले लिए हैं, जिनकी अलग से जांच करा रहे हैं।
मध्यप्रदेश में सिंथेटिक दूध, मावा और पनीर बनाने के लिए बदनाम भिण्ड जिले में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। प्रदेश सरकार ने इस कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राज्यस्तरीय टीम बना दी है, लेकिन इस टीम ने भी भिण्ड के कारोबारियों को मानो छूट दे दी है क्योंकि वे अब तक भिण्ड में कार्रवाई करने ही नहीं आए। यह टीम ग्वालियर और मुरैना में ही कार्रवाई कर रही है। साथ ही भिण्ड के फूड सेफ्टी ऑफिसरों को भी अपने साथ शामिल कर लिया है। इससे भिण्ड जिले में सिंथेटिक दूध, मावा और पनीर का कारोबार जमकर फलफूल रहा है।
भिण्ड जिले में 12 के करीब चिलर सेंटर और 120 से ज्यादा दूध डेयरियां है, जिन पर बडी मात्रा में सिंथेटिक दूध, मावा, पनीर तैयार कर भिण्ड जिले सहित दूसरों जिलों में सप्लाई किया जा रहा है। वहीं लहार में एसटीएफ की कार्रवाई के अगले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक चिलर और डेयरी पर छापामार कर तीन सैंपल लिए। इसके बाद यहां कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि भिण्ड में दो फूड सेफ्टी ऑफिसर हैं, जिसमें लोकेंद्र सिंह को राज्य स्तरीय टीम में शामिल कर उन्हें मुरैना लगा दिया गया है। जबकि सतेंद्र सिंह धाकड को ग्वालियर बुला लिया गया है।
भिण्ड जिले के लहार में सिंथेटिक दूध बनाते हुए पकडे गए डेयरी और चिलर सेंटर संचालकों पर एसटीएफ पूरी तरह से शिकंजा कसने की तैयारी में जुट गई है। एक ओर एसटीएफ की टीम उनके रिकॉर्ड से गडबडियों को बिंदुवार छांट रही है। वहीं उनके यहां से लिए गए सैंपलों की वह अलग से जांच कराने जा रही है। कल एसटीएफ ने फूड सेफ्टी की टीम से डेयरी और चिलर सेंटर से लिए गए नमूनों का एक-एक यूनिट अलग से ले ली है, जिसे स्टेट फारेंसिक सांइस लेबोरेटरी (एफएसएल) सागर से कराने के लिए बातचीत कर रही है, अन्यथा उसे केंद्रीय प्रयोगशाला मैसूर भेजा जाएगा।
ग्वालियर एसटीएफ ने लहार में गिर्राज डेयरी और गोपाल आइस फैक्टरी पर कार्रवाई के बाद उनके मालिकों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। ग्वालियर एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने बताया कि मुरैना से एक चिलर संचालक को पकड लिया गया है जबकि लहार के चिलर व डेयरी संचालकों की गिरफ्तारी के लिए टीमें काम कर रही है। उन्होंने बताया कि दोनों के मालिक अभी फरार चल रहे है लेकिन जल्द उन्हें पकड लिया जाएगा।

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