ग्वालियर। एक साल से बेटी को इंसाफ दिलाने महिला थाना के चक्कर काट रहे पिता ने आखिरकार हार कर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। महिला थाना पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही थी। हर बार पीडिता परिवार को सुनवाई के लिए नई तारीख देकर मामले को टाल रही थी। जबकि इस मामले में ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक ने भी मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पुलिस की कथनी करनी में अंतर को लेकर पीडितों को न्याय नहीं मिल रहा है। महिलाओं को सुरक्षा देने का काम पुलिस कागजों में कर रही है। अगर पुलिस पीडित पिता की गुहार सुन लेती तो आज एक और जान न जाती।

ग्वालियर जनकगंज थाना क्षेत्र स्थित सत्य नारायण टेकरी निवासी 60 वर्षीय ब्रह्मजीत शर्मा व उनकी पत्नी सिलाई का काम करते हैं। उनके तीन बेटी व एक बेटा है। फरवरी 2018 में उन्होंने बेटी दिव्या शर्मा की शादी उत्तरप्रदेश के आगरा में योगेश शर्मा से की थी। पर शादी के बाद से ही दिव्या को उसका पति व ससुराल पक्ष परेशान करने लगा। करीब एक साल पहले दिव्या को मारपीट कर घर भेज दिया। तभी दिव्या अपने पिता के साथ महिला थाना पहुंची और शिकायत की। उस समय एसपी ग्वालियर को भी एफआईआर के लिए आवेदन दिया। पर इस मामले में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं हो सका। बेटी की स्थिति को देखकर ब्रह्मजीत शर्मा दुखी थे। सोमवार को उन्होंने परिवार से नजर बचाकर खुद को कमरे में बंद किया और फांसी लगाकर जान दे दी।

मृतक के बेटे पारस शर्मा ने बताया कि एक साल पहले एसपी ग्वालियर को शिकायत की। एसपी ने महिला थाना प्रभारी को मामला दर्ज करने के लिए कहा। महिला थाना पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। जब भी पिता बेटी को लेकर थाना जाते थे तो महिला थाना प्रभारी एफआइआर करने के बदले एक या डेढ महीने आगे की तारीख थमा देती थी। जिससे बेटी का पिता खुद के अपमानित महसूस कर रहा था।

महिला थाना में शिकायत करने के बाद पुलिस हर बार नई तारीख यह कहते हुए देती थी कि दूसरे पक्ष को भी बुलाया जाएगा। पर पूरे एक साल में सिर्फ महिला थाना प्रभारी ने एक बार ही दूसरे पक्ष केा बुलाया। उनसे भी खुद बात की और पीडित परिवार को नई तारीख थमा दी।

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