छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर में लोकायुक्त पुलिस ने बीआरसीसी कार्यालय में छापामार कार्रवाई कर लोकायुक्त टीम ने बीआरसीसी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त टीम ने यह कार्रवाई एक निजी स्कूल संचालक की मांग पर की है। अधिकारी स्कूल संचालक से राइट टू एजूकेशन योजना के तहत छात्रों की फीस का शासन से भुगतान कराने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे थे। आरोपी जून 2020 से स्कूल का फीस संबंध प्रस्ताव अपने पास रोके हुए हैं।

इसके बाद लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की। इस मामले में कार्रवाई में टीआई मंजू सिंह का कहना है कि स्कूल संचालक कमला प्रसाद मिश्रा ने आवेदन दिया था कि, इनके स्कूल में आरटीई के तहत जो बच्चे अध्यनरत रहे है उनके 2018 और 2019 के प्रपोजल को सत्यापित करने के लिए नोडल अधिकारी केडी भार्गव द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। जिसकी शिकायत फरियादी के द्वारा बीआरसीसी से की गई। तो बीआरसीसी के द्वारा प्रपोजल सत्यापित करने के नाम पर 60 हजार रुपए रिश्वत की मांग की।

फरियादी के द्वारा 4 हजार रुपए की रिश्वत पहले दी जा चुकी थी। सोमवार को 10 हजार रुपए लेते हुए बीआरसीसी को पकड़ा गया है। फरियादी द्वारा दी गई रिकॉडिग में बीआरसीसी लखन लाल सिसौदिया के द्वारा कहा जा रहा है कि जब आप 60 हजार की रिश्वत मुझे उपलब्ध करा देंगे तब आपका प्रपोजल लेटर आगे बढ़ाया जाएगा।

सोमवार को दोनों अधिकारियों ने 10 हजार रुपए की रिश्वत लेने के लिए कमलापत मिश्रा को कार्यालय में बुलाया था। जैसे ही कमलापत रिश्वत लेकर कार्यालय पहुंचे उन्होंने बीआरसीसी को पैसा दिया तभी सागर लोकायुक्त की निरीक्षक मंजू सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके हाथ धुलवाए गए तो वह नोटों के साथ लगाए गए कैमिकल के कारण लाल हो गए।

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