मुरैना। मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल के दौरे पर निकले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को एक बार फिर अपने बयान से सियासी हलकों में चर्चाओं को हवा दे दी। मुरैना के एक गांव में मिनी क्रिकेट स्टेडियम में जब उनके हाल ही के बयानों के बाद अन्य नेताओं के जवाबी बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में राजनीति नहीं होनी चाहिए, पर राजनीति के मैदान में खेल जरूर होना चाहिए। मुरैना में पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जब करुआ गांव में बने नवीन स्टेडियम के शुभारंभ के बाद मीडिया से रूबरू हुए तो पत्रकारों ने उनसे हाल ही में प्रदेश सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के बयान को लेकर जवाब चाहा। उन्होंने इस सवाल को यह कहकर टाल दिया कि मैं बयानों को लेकर कभी कोई बयान नहीं देता।

सिंधिया से जब पूछा गया कि कर्जमाफी को लेकर उन्होंने भिण्ड में जो बयान दिया था उस पर सीएम कमलनाथ ने कहा है कि जनता सभी को पहचानती है। इस सवाल के जवाब में सिंधिया ने कहा कि प्रजातंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। यही प्रजांतत्र की खूबी है। हर व्यक्ति को उसकी बात के लिए सम्मान मिलना चाहिए और हमें उसकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज में खेल के मैदान में खडा हूं, मैं खेल के मैदान में राजनीतिक प्रश्नों के उत्तर नहीं देता हूं क्योंकि खेल के मैदान में राजनीति नहीं होनी चाहिए पर राजनीति के मैदान में खेल जरूर होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि ग्वालियर चंबल संभाग के जिलों का दौरा कर रहे सिंधिया ने हाल ही में ग्वालियर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा था कि कांग्रेस को अपनी वर्तमान स्थिति पर आत्मचिंतन करना चाहिए। वहीं भिण्ड दौरे पर किसानों के शिकायतें सुनते समय कहा था कि हमने किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, जबकि किसानों के केवल 50 हजार के ही कर्ज माफ हुए हैं।

किसानों की कर्ज माफी को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान पर पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा ने सिंधिया का नाम लिए बिना कहा, शायद उनकी अंतर-आत्मा जाग गई। उन्हें अपने दादा-परदादा की याद आ गई, जो किसानों को अन्नदाता मानते थे। भिण्ड प्रवास के दौरान शनिवार को अनूप मिश्रा ने कहा कि उनके (सिंधिया) परिवार के बारे में कहा जाता है जब किसान उनके दरवाजे पर गए तो वे दौडे आए, कहा मेरे अन्नदाता आ गए। उन्होंने अपनी वंश परंपरा को रखते हुए यह बात कही होगी।

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