विदिशा। शहर से करीब 3 किमी. दूर स्थित ऐतिहासिक उदयगिरी पहाड़ी पर जैन धर्म से जुड़ीं गुफा नंबर 1 और 20 को 15 साल बाद खोला जाएगा। इन गुफाओं में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाएं स्थापित हैं। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल के निर्देश पर शुक्रवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्किल असिस्टेंट संदीप मेहतो ने यह जानकारी जैन समाज को दी।

सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि पिछले दिनों केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री श्री पटेल के दौरे के समय जैन समाज ने ज्ञापन देकर यह मांग की थी। शुक्रवार की सुबह मुनिसंघ की प्रवचन सभा में पहुंचे भाजपा नेता संदीप डोंगरसिंह और एएसआई के अधिकारी संदीप मेहतो ने बताया कि जैन समाज के आग्रह पर केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री श्री पटेल ने उदयगिरी पर स्थित गुफा नंबर 1 और 20 को खोलने की अनुमति दे दी है। यह गुफाएं प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खोली जाएंगी।

करीब 15 साल पहले एएसआई ने इन गुफाओं को सुरक्षा के कारण बंद कर दरवाजों पर ताले लगा दिए थे। जैन समाज के मुताबिक भगवान शीतलनाथ की तपोभूमि कहलाने वाले इस क्षेत्र में शीतलाष्टमी पर हर साल उदयगिरि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे। यहां पूजा अर्चना भी की जाती थी, लेकिन गुफाएं बंद होने के बाद क्रम रुक गया था।

इतिहासकारों के अनुसार उदयगिरि पहाड़ी पर पांचवी शताब्दी में बनी लगभग 20 गुफाएं हैं। इनमें वैष्णव धर्म के अलावा जैन धर्म से संबंधित प्रतिमाएं भी हैं। गुफा नंबर 20 नंबर पहाड़ी पर सबसे ऊपरी क्षेत्र में है। इसके भीतरी भाग में प्रवेश द्वार के दोनों तरफ पद्मासन मुद्रा में 4 जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं उत्कीर्ण हैं। प्रवेश द्वार पर गुप्तकालीन शिलालेख हैं। जिसमें आचार्य गोसरमन के एक शिष्य शंकर द्वारा सर्पछत्रयुक्त 23वें जैन तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थापित करने का उल्लेख मिलता है।

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