भोपाल। स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद आजीवन कारावास से दंडित 156 वंदियों को रिहा किया गया। इस संबंध में जेल मुख्यालय ने आदेश जारी किए थे। जिन 156 बंदियों को रिहा किया गया है, उनमें छह महिलाएं भी शामिल हैं। बंदियों के अच्छे आचरण, उम्र और जेल के अंदर उनके कार्यों को देखते हुए नियमों के तहत प्रति वर्ष सजा में विशेष माफी प्रदान कर आजीवन कारावास के कुछ बंदियों को रिहा किया गया है। आजीवन कारावास से दंडित बंदियों में बलात्कार, पाक्सो आदि प्रकरण वाले दंडित बंदियों को किसी भी प्रकार की माफी प्रदान नहीं की गई है। बंदियों को जेल में निरुद्ध रहने के दौरान उनके पुनर्वास हेतु उन्हें टेलरिंग, कारणेल्ली लौहारी, भवन मिस्त्री, भवन सामग्री निर्माण आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे रिहा होने के पश्चात वह अपनी जीवकोपार्जन के साधन अर्जित कर सकें। प्रदेश सरकार की बंदियों की रिहाई नीति के अनुसार एक वर्ष में पांच अवसरों पर यानी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, गांधी जयंती और 15 नवंबर राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को पात्रतानुसार रिहा किया गया है।

महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, डॉ. वरुण कपूर ने रिहा हुए बंदियों से अपील करते हुए कहा है कि अब वह लोग काई अपराध नहीं करें। जेल में रहने के दौरान जो कौशल और प्रशिक्षण अर्जित किया है, उसका उपयोग अपने परिवार के जीविकोपार्जन एवं अच्छे समाज के नव-निर्माण में सहभागी बनने के लिए करें।