मध्य प्रदेश के दमोह में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी अस्पतालों में नौकरी कर रहे तीन कथित डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें से दो आरोपियों को दमोह और एक को जबलपुर से पकड़ा गया है।

जांच में सामने आया कि इन डॉक्टरों ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नौकरी हासिल की थी। मामला सामने आने के बाद दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

जांच में हुआ फर्जी डिग्री का खुलासा
पुलिस के अनुसार एक साल पहले संजीवनी अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती हुई थी, जिसमें ग्वालियर के डॉ. कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी डॉ. राजपाल गौर ने फर्जी MBBS डिग्री के आधार पर नियुक्ति पाई थी। पूछताछ में दोनों ने अपनी डिग्री फर्जी होने की बात स्वीकार कर ली।

तीसरा आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार
जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने एक अन्य साथी का नाम भी बताया, जो जबलपुर में इसी तरह फर्जी डिग्री के सहारे काम कर रहा था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जबलपुर से अजय मौर्य को गिरफ्तार कर लिया।

बड़ा गिरोह होने की आशंका
दमोह एसपी आनंद कलादगी के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों की नियुक्ति के पीछे पैसों का लेन-देन हुआ था। आरोप है कि फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन के आधार पर नौकरी दिलाने वाला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पुलिस अब इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।