नई दिल्ली। संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि अहम प्रतियोगी परीक्षाओं के दिन जिला प्रशासन को किसी भी रैली, जुलूस या जनसभा की अनुमति नहीं देनी चाहिए ताकि यातायात सुचारू रहे। कानून-व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम पहले से हों और किसी भी परीक्षार्थी को बाहरी व्यवधानों का सामना न करना पड़े। राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने से संबंधित रिपोर्ट में यह सिफारिश की। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने के विवाद और एनटीए में कथित प्रशासनिक खामियों के बाद आई है।

इस विवाद के कारण देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। अंततः तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया है, ”परीक्षा के दिन रैलियों, जुलूसों या बड़ी सभाओं के कारण परीक्षार्थियों को पहुंचने में देरी हो सकती है। वे पहुंचने के निर्धारित समय से चूक सकते हैं। समिति सिफारिश करती है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन कर जिला प्रशासन को परीक्षा के दिन किसी भी रैली, जुलूस या अन्य जनसभा की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि यातायात सुचारू रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम पहले से हों, ताकि किसी भी परीक्षार्थी को टाले जा सकने वाले बाहरी व्यवधान का सामना न करना पड़े।”

अब तक एनटीए ने परामर्श जारी कर छात्रों से परीक्षा केंद्रों पर पहले पहुंचने और परीक्षा के दिन ऐसे आयोजन होने पर उसी के अनुसार अपनी व्यवस्था करने को कहा है। संसदीय समिति ने प्रक्रियागत मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की देरी से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को अक्सर प्रवेश ही नहीं दिया जाता। इससे उनकी पूरे साल की मेहनत बेकार हो जाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ”समिति का मानना है कि कुछ वास्तविक कारणों से परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंच सकते हैं। समिति का विचार है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए। इसके तहत छात्रों को देर से पहुंचने का कारण दर्ज करने वाले लिखित वचनपत्र पर हस्ताक्षर कराने के बाद परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जा सके। उन्हें केवल बचे हुए समय में परीक्षा देने की अनुमति हो और किसी भी परिस्थिति में अतिरिक्त समय नहीं दिया जाए।”

समिति ने यह भी कहा कि परीक्षा के दौरान निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने और जांच संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने से उन छात्रों का ध्यान भटकता है, जो पहले से ही समय के दबाव में परीक्षा दे रहे होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ”समिति का विचार है कि ऐसी औपचारिकताओं के लिए परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद 15 मिनट का अलग समय निर्धारित किया जाए और परीक्षा की अवधि के बीच ये औपचारिकताएं पूरी न की जाएं।”