नवरात्रि की रातें, ढोल की थाप, रंग-बिरंगे चनिया-चोली और डांडिया की खनक. गरबा सिर्फ एक पारंपरिक नृत्य नहीं, बल्कि उत्साह, सामूहिकता और ऊर्जा का उत्सव है. इन नौ दिनों में कई लोग रोजाना घंटों तक गरबा करते हैं. लेकिन जो गतिविधि आनंद और फिटनेस का जरिया बन सकती है, वही अचानक शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने पर दर्द और चोट की वजह भी बन सकती है.

मुंबई के फिजियोथेरेपी क्लीनिकों में नवरात्रि के दौरान टखने में मोच, घुटनों में दर्द और कमर में खिंचाव जैसी समस्याओं में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि होने का दावा रिपोर्ट में किया गया है. हालांकि, यह आंकड़ा संबंधित रिपोर्ट में दिया गया है और इसे देशभर के सभी गरबा आयोजनों का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए.
विशेषज्ञों के मुताबिक, परेशानी का एक बड़ा कारण है रोजमर्रा की कम शारीरिक गतिविधि के बाद अचानक लंबे समय तक तेज गति से नृत्य करना. ऐसे में गरबा शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करना, सही फुटवियर चुनना और अपनी क्षमता के अनुसार नृत्य करना जरूरी है.
गरबा में तेजी से घूमना, दिशा बदलना, बार-बार कदमों को मोड़ना और उछलते हुए नृत्य करना शामिल है. भीड़भाड़ वाली जगह या असमान सतह पर अचानक पैर मुड़ने से टखने में मोच आ सकती है. कई बार नृत्य करते समय पैर जमीन पर स्थिर रहता है, लेकिन शरीर तेजी से घूमता है. इससे घुटने पर दबाव बढ़ सकता है.
फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी फुल्लारा के अनुसार, गरबा के दौरान टखने की मोच, घुटने के आसपास दर्द और एड़ी या पंजे में तकलीफ प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं. लंबे समय तक कठोर फर्श पर नृत्य करने और पतले सोल वाले जूते पहनने से पैरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
घुटने के आसपास हल्का दर्द शुरुआत में सामान्य थकान जैसा लग सकता है, लेकिन घूमते समय तेज दर्द महसूस होना या दर्द का लगातार बढ़ना नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसी तरह, एड़ी या पैर के अगले हिस्से में होने वाला दर्द कई बार नृत्य के दौरान नहीं, बल्कि अगली सुबह पहले कदम रखते समय महसूस होता है.
गरबा के पारंपरिक पहनावे के साथ जूतों का चुनाव करना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है. हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि केवल दिखावे या परंपरा के बजाय पैरों की सुरक्षा और आराम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
स्पोर्ट्स शूज: अधिकांश लोगों के लिए अच्छी कुशनिंग और लचीले सोल वाले हल्के स्पोर्ट्स शूज बेहतर विकल्प हो सकते हैं. लेकिन सोल की पकड़ बहुत ज्यादा होने पर घूमते समय पैर जमीन पर अटक सकता है और घुटने पर मरोड़ का दबाव बढ़ सकता है. इसलिए संतुलित ग्रिप वाले जूते चुनना उपयोगी है.
नंगे पैर गरबा: साफ, समतल और अच्छी तरह रखरखाव वाली सतह पर थोड़े समय के लिए नंगे पैर नृत्य करना कुछ लोगों को सहज लग सकता है. लेकिन कठोर जमीन, कंकड़ या रेत वाली जगह पर चोट का खतरा बढ़ जाता है. फ्लैट फुट या एड़ी में दर्द की समस्या वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए.
पारंपरिक जूतियां: जूतियां पहनावे के साथ अच्छी लगती हैं, लेकिन कई जूतियों में कुशनिंग और आर्च सपोर्ट सीमित होता है. लंबे समय तक नृत्य करने पर इससे पैरों में थकान या दर्द हो सकता है. यदि जूतियां पहननी हों, तो उनका फिट और आराम जांचना जरूरी है.
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मुस्तानसिर अब्बासी के अनुसार, नृत्य के दौरान हल्के और आरामदायक कपड़ों के साथ सही आकार के, अच्छी कुशनिंग वाले जूते शरीर पर अनावश्यक दबाव कम करने में मदद कर सकते हैं.
गरबा शुरू करने से पहले शरीर को अचानक तेज गतिविधि में झोंकने के बजाय कुछ मिनट तैयारी के लिए देने चाहिए. विशेषज्ञों ने पांच मिनट के वार्मअप का सुझाव दिया है, जबकि घर पर लगभग 10 मिनट की तैयारी भी की जा सकती है.
पहला मिनट – शरीर को गर्म करें: एक ही जगह पर धीरे-धीरे मार्च करें. घुटनों को आराम से ऊपर उठाएं और हाथों को भी हिलाएं. इससे शरीर को गतिविधि के लिए तैयार होने में मदद मिलती है.
दूसरा मिनट – टखनों और पिंडलियों को सक्रिय करें: दोनों टखनों को हर दिशा में लगभग 10 बार घुमाएं. इसके बाद एड़ियों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर 15 बार नीचे लाएं.
तीसरा मिनट – कूल्हों को तैयार करें: किसी दीवार या सहारे के पास खड़े होकर प्रत्येक पैर को आगे-पीछे और दाएं-बाएं लगभग 10 बार आराम से घुमाएं.
चौथा मिनट – पैरों को तैयार करें: अपनी क्षमता के अनुसार 10 सामान्य स्क्वैट्स और प्रत्येक तरफ पांच हल्के लंज करें. घुटनों को पंजों की दिशा में रखें और दर्द होने पर गतिविधि रोक दें.
पांचवां मिनट – गरबा के कदमों का अभ्यास करें: अपने सामान्य ताली, कदम और घूमने की चाल को आधी गति से दोहराएं. डांडिया खेलने वाले लोग कंधों और कलाइयों को भी हल्के से घुमा सकते हैं.
वार्मअप के दौरान जल्दबाजी न करें. यदि पहले से दर्द है, तो केवल वार्मअप कर लेने से चोट का जोखिम समाप्त नहीं हो जाता.
लंबे समय तक नृत्य करने के बाद अगले दिन मांसपेशियों में हल्का दर्द या अकड़न महसूस हो सकती है. लेकिन तेज, एक जगह केंद्रित दर्द, सूजन या पैर पर वजन न रख पाना गंभीर चोट का संकेत हो सकता है.
डॉ. अब्बासी के मुताबिक, टखने या घुटने के लिगामेंट में चोट लगने पर तेज दर्द और सूजन हो सकती है. गिरते समय चटकने जैसी आवाज सुनाई देना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है.
यदि गिरने के बाद तेज दर्द हो, सूजन तेजी से बढ़े, प्रभावित पैर पर वजन रखना संभव न हो या किसी खास जगह को छूने पर बहुत दर्द हो, तो नृत्य जारी न रखें और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें. शुरुआती देखभाल के लिए प्रभावित हिस्से को आराम देना और कपड़े में लपेटकर बर्फ से ठंडी सिकाई करना मददगार हो सकता है. गंभीर चोट की स्थिति में जांच में देरी नहीं करनी चाहिए.
जिन लोगों को पिछले तीन सप्ताह में टखने में मोच, घुटने में दर्द या कमर की चोट हुई है, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक गरबा नहीं करना चाहिए. पुरानी चोट पूरी तरह ठीक न होने पर तेज घूमने और बार-बार कदम बदलने से परेशानी बढ़ सकती है.
फ्लैट फुट, लगातार कमर दर्द या पहले से घुटने की समस्या वाले लोगों को भी अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार गतिविधि चुननी चाहिए. डॉक्टर की अनुमति मिलने पर कुछ मामलों में टेपिंग, स्ट्रैपिंग या घुटने और टखने के ब्रेस का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, ये सहायक उपाय चोट के उचित इलाज का विकल्प नहीं हैं.
नवरात्रि में कई लोग व्रत रखते हैं और शाम से देर रात तक गरबा करते हैं. लंबे समय तक खाली पेट रहकर तेज गतिविधि करने से कमजोरी, चक्कर या मांसपेशियों में ऐंठन की परेशानी हो सकती है.
क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. नूपुर कृष्णन के अनुसार, गरबा से एक से दो घंटे पहले हल्का लेकिन ऊर्जा देने वाला भोजन करना उपयोगी है. केला, दही, थोड़े सूखे मेवे, ओट्स, मखाना, शकरकंद या व्रत में खाया जाने वाला समक चावल जैसे विकल्प व्यक्ति की खानपान संबंधी जरूरतों और व्रत के नियमों के अनुसार चुने जा सकते हैं.
नृत्य के दौरान पर्याप्त पानी पीना जरूरी है. ज्यादा पसीना आने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो सकती है. नींबू पानी, नारियल पानी या जरूरत के अनुसार ओआरएस जैसे विकल्प उपयोगी हो सकते हैं. ओआरएस का इस्तेमाल पैकेट पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें. यदि चक्कर, असामान्य कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो नृत्य रोककर सहायता लें.
बीच-बीच में फल, मखाना या अन्य हल्के स्नैक्स लिए जा सकते हैं. ऊर्जा देने वाले पेय को पानी का विकल्प न मानें. अत्यधिक कैफीन या एनर्जी ड्रिंक लेने के बजाय पर्याप्त तरल और संतुलित खानपान पर ध्यान दें.
नृत्य खत्म होते ही अचानक बैठ जाने या लेट जाने के बजाय लगभग पांच मिनट धीरे-धीरे चलें. इसके बाद पिंडलियों, जांघों, हैमस्ट्रिंग और कूल्हों की मांसपेशियों को आराम से स्ट्रेच करें. प्रत्येक स्ट्रेच लगभग 30 सेकंड तक किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में झटके न दें.
पानी पीकर शरीर में तरल की कमी पूरी करें. पैरों के तलवों को हल्के दबाव के साथ बॉल पर घुमाना या कुछ समय के लिए पैरों को ऊंचा रखकर आराम करना भी थकान कम करने में सहायक हो सकता है. यदि दर्द या सूजन है, तो प्रभावित हिस्से पर जोरदार मालिश न करें.
रात में पर्याप्त नींद लेना भी रिकवरी का अहम हिस्सा है. लगातार कई रात गरबा करने वालों को अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर नृत्य का समय कम करना चाहिए.
गरबा की असली खूबसूरती ऊर्जा, संगीत और साथ मिलकर उत्सव मनाने में है. लेकिन उत्साह में शरीर की क्षमता से अधिक नृत्य करना चोट का कारण बन सकता है. सही जूते, पांच से दस मिनट का वार्मअप, पर्याप्त पानी, संतुलित खानपान और नृत्य के बाद रिकवरी जैसी छोटी आदतें जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं.
इस नवरात्रि गरबा के हर चक्कर में जोश बनाए रखें, लेकिन दर्द को चुनौती समझकर नजरअंदाज न करें. शरीर तैयार हो, कदम संभले हों और रिकवरी पूरी हो, तभी नौ रातों का उत्सव सेहत के साथ पूरा किया जा सकता है.
