इंदौर। राज्य शासन के ऑपरेशन क्लीन का दायरा बढाने के मुख्यमंत्री के फैसले के तत्काल बाद इंदौर में भी माफिया के खिलाफ कार्रवाई का एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। गुरुवार को भोपाल में हुई बैठक में शामिल होकर लौटे संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने शाम को ही प्रमुख विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाई। उन्होंने इंदौर में 11 तरह के माफियाराज के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा, जिनसे आम जनता और ईमानदारी से कारोबार करने वाले त्रस्त हैं। मीटिंग खत्म होते ही पुलिस ने परदेशीपुरा, रावजी बाजार, पलासिया, एमआईजी थाना क्षेत्रों में सक्रिय माफिया को चिन्हित करते हुए प्रारंभिक सूची तैयार कर ली। संभायुक्त आकाश त्रिपाठी ने संकेत दिए है कि ऐसे अधिकारियों की भी सूची बनाई जा रही है जो माफियाओं को हर तरह का सहयोग करते हैं, तथा अभी भी गुपचुप तरीके से संपर्क रखकर सहयोग कर रहे है। माफिया तभी पनपता है जब प्रशासन उनके कार्यों को अनदेखा करते है। ऐसे अधिकारियों की सूची कार्यवाही के लिए राज्य सरकार को भेजी जाएगी।
संभागायुक्त ने बताया कि संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को अवैध गतिविधियों में लिप्त बडे माफिया को चिन्हित करने के लिए कहा गया है। इनकी सूची तैयार कर सभी संबंधित अधिकारियों को बांटी जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ संयुक्त और एक पूर्ण कार्रवाई की जाएगी।
माफिया के अवैध कारोबार को ध्वस्त करने के साथ उनके घरों और अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों की बैठक में संभागायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि समाज विरोधी संगठित अपराध करने वालों को सख्ती से कुचला जाए। आम आदमी के हित में न्याय होना चाहिए और यह दिखना भी चाहिए। संभागायुक्त के निर्देश पर शीघ्र ही कलेक्टर कार्यालय में पुलिस और प्रशासन का संयुक्त शिविर लगाया जाएगा, जहां ऐसे माफिया के खिलाफ शिकायतें सुनी जाएंगी।
कलेक्टर लोकेशकुमार जाटव ने बताया कि सीलिंग और नजूल की जमीन पर कॉलोनी काटने वाले, अवैध तरीके से शराब बेचने और परिवहन करने वाले माफिया की जानकारी जुटाई जा रही है। कुछ दिन में इनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
शाम को संभागायुक्त की बैठक में कलेक्टर के अलावा नगर निगम आयुक्त आशीष सिंह, इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ विवेक श्रोत्रिय, क्षेत्रीय परिवहन उपायुक्त संजय सोनी, एसपी यूसुफ कुरैशी, सूरज वर्मा, अवधेश गोस्वामी, उपायुक्त (राजस्व) सपना सोलंकी, सहकारिता, खनिज, आबकारी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
प्रशासन ने 11 तरह के माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही करने की योजना तैयार की है। फिरौती का कारोबार चलाने और अन्य कामों के लिए फिरौती मांगना। लोगों को धमकाकर जमीनों पर अवैध कब्जे करना। सहकारिता क्षेत्र में हाउसिंग संस्थाएं बनाकर आम सदस्यों के भूखंडों पर कब्जे करना। बाद में बडा मुनाफा लेकर दूसरों को भूखंड बेचने वाले भूमाफिया। परमिट लेने के बाद अवैध तरीके से बसें चलाने वालों को संरक्षण देना। नियम से काम करने वाले ट्रांसपोर्टरों को धमकाना। जो माफिया शराब ठेकेदार भी नहीं हैं, लेकिन शराब का अवैध कारोबार चला रहे हैं। अवैध कॉलोनी या बडी टाउनशिप बनाकर उसमें बिजली, पानी, सडक, ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं करना। लोगों को प्लॉट या मकान बेचकर भाग जाना।
शासकीय जमीन पर चूना डालकर प्लॉट काटना और फिर जरूरतमंद लोगों को सस्ते प्लॉट का प्रलोभन देकर नोटरी पर भूखंड बेच देना। नशे के काराबोर करने वाले ड्रग्स माफिया। शहर में कुछ ठिकानों से ड्रग्स की सप्लाई होती है जो युवा और किशोर पीढी को अपनी गिरफ्त में लेकर बर्बाद कर रही है। खाने-पीने की चीजों में मिलावट करके बेचने वाले कारोबारी। चिटफंड कंपनी बनाकर जनता को ठगने की स्कीम बनाना। फिर लोगों का पैसा जमा करवाकर भाग जाना। अवैध खनन करने वाले माफिया। खनिज विभाग द्वारा जितना क्षेत्र खनन के लिए लीज पर दिया गया है, उससे अधिक एरिया में अवैध तरीके से खनन करना और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाना। किसी भी तरह की शिकायत कर ब्लैकमेल करने वाले बदमाश। इन्हें भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।
