भोपाल। हर घर बिजली पहुंचाने की पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना के तहत मध्य प्रदेश में बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। केंद्र सरकार के साल 2017 में हर घर को रोशन करने के लिए शुरू की गई सौभाग्य योजना में राज्य के कई जिलों में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। अकेले मंडला जिले में ही घटिया स्तर के काम होने और उपकरण खरीदी में गड़बड़ी सामने आई है। सरकार ने मंडला में संबंधित ठेकेदारों और अफसरों से 10 करोड़ की रिकवरी निकाली है। एक जिले की गड़बड़ी सामने आने के बाद दूसरे जिलों में मिली शिकायतों की जांच का जिम्मा पावर मैनेजमेंट कंपनी के अफसरों को सौंपा गया है। सरकार को मंडला के अलावा बालाघाट, भिंड और मुरैना जिले में भी गड़बडिय़ों की शिकायतें मिली हैं। इसमें संबंधित अफसरों के खिलाफ सरकार ने जांच के निर्देश जारी किए है।
केंद्र सरकार की सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य के तहत उत्तर प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के सभी गांव में बिजली पहुंचाने का काम होना था। इस योजना के तहत विशेष रूप से गरीब लोगों को बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करनी थी। जिन लोगों का नाम साल 2011 की सामाजिक आर्थिक जनगणना में है, उन्हें मुफ्त बिजली कनेक्शन और जिनका नाम सामाजिक आर्थिक जनगणना में नहीं हैं, उन्हें सिर्फ 500 रुपए के शुल्क पर कनेक्शन दिया जाना था। देश के जिन इलाकों में बिजली नहीं पहुंची हैं, वहां सौभाग्य योजना के तहत सरकार ने हर घर को एक सोलर पैक (5 एलईडी बल्ब और एक पंखा) देने की व्यवस्था की थी। योजना का बजट 16 हजार करोड़ का था।
मध्य प्रदेश में भी सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन देने की शुरुआत हुई। लेकिन सरकार को कई जिलों से योजना में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत मिली है। शुरुआती तौर पर मंडला, भिंड, मुरैना, सीधी और बालाघाट में गड़बडिय़ों की शिकायत है, जिसकी जांच के निर्देश सरकार ने दिए हैं। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने कहा है कि सौभाग्य योजना में जिन जिलों में शिकायतें मिली हैं, वहां दो महीने में जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सरकार प्रदेश में बिजली कंपनियों की माली हालत पर जल्द ही श्वेत पत्र जारी करने की तैयारी में है, ताकि बीजेपी सरकार में बिगड़ी बिजली कंपनियों की दशा को सार्वजनिक किया जाए।
