इंदौर। इंदौर पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है। परिवहन विभाग, टोल आदि के फर्जी कागजात से करोड़ों की हेराफेरी करने वाला राष्ट्रीय स्तर के गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। यूपी के सरगना बाप बेटे यह गिरोह चला रहे थे।

आरोपीगण फर्जी कागजात से धोखाधड़ी कर, औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर के आटोमोबाईल उद्योग तथा शासन के राजस्व को चपत लगा रहे थे। इनके तार उत्तरप्रदेश, बिहार बार्डर, तमिलनाडू, राजस्थान, कर्नाटक तक फैले होने की जानकारी मिली है। पकड़े गए आरोपियों के नाम शैलेन्द्र राय पिता लालता प्रसाद राय उम्र 27 साल नि. सकलडीहा बाजार जिला चंदौली (उ.प्र.), उसका बाप लालता प्रसाद राय पिता स्व. दशरथ राय उम्र 62 साल और विनोद यादव पिता रमाशंकर यादव उम्र 43 वर्ष नि. 18 इंडस कालोनी पीथमपुर जिला धार है।

इनमे आरोपी लालताप्रसाद राजभर व उसका पुत्र शैलेन्द्र राय पूर्व में भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े के केस में जिला चंदौली उत्तरप्रदेश में गिरफ्तार हो चुके हैं।

आरोपी विनोद यादव ने जिला चंदौली उत्तरप्रदेश से अपने साथियों को यहां बुलाकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। पुलिस किशनगंज को मुखबीर व्दारा सूचना मिली कि महू पीथमपुर मेन रोड़ पर स्थित पेट्रोलपंप के पास अमानत पार्क कालोनी में विनोद यादव नें दो व्यक्तियों को अपने कमरे पर रखा है

जो फर्जी रसीदे, टोल पर्चियां, टोकन इत्यादि कम्प्यूटर प्रिंटर पर तैयार कर पीथमपुर स्थित आयसर, फोर्स, मान, हिन्दुस्तान, महिन्द्रा आदि कंम्पनी के वाहनों को लेकर जाने वाले ड्रायवरों को देकर रुपये लेते है। इन नकली पर्चियों, फर्जी रसीदों पर छपी राशि को ड्रायवर अपनी कंपनियों में पेश कर खर्चा बताकर रुपये वसूलते है।

उक्त सूचना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महू धर्मराज मीणा, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विनोद कुमार शर्मा द्वारा पुलिस किशनगंज की टीम गठित कर विनोद यादव के मकान पर पहुंचे जहाँ पर उक्त तीनों व्यक्ति लेपटाप/कम्प्यूटर आदि से कुछ पर्चियां व कागजात बनाते मिले।

पूछताछ में विनोद यादव द्वारा कम्प्युटर आपरेटर शैलेन्द्र राय व लालता प्रसाद के सहयोग से, पीथमपुर क्षेत्र से अन्य राज्यों के शहरों में ले जाने वाले वाहनों के ड्रायवरों को टोलनाके, परिवहन विभाग, व अन्य विभागों की फर्जी रसीदे व नकली पर्चियां तैयार कर देना स्वीकार किया गया तथा वाहन चालकों व्दारा उपलब्ध कराये गई नमूना रसीदों व पर्चियों को कम्प्युटर के माध्यम से हु-बहु तैयार कर प्रिंट कर देकर फर्जी रबर स्टाम्प लगाकर जालसाजी कर दस्तावेजों का कूटकरण कर चालकों को देने का अपराध करना स्वीकार किया गया।

आरोपियों के कब्जे से एक लैपटाप 01, प्रिंटर 03 नग, कम्प्यूटर, प्रिंटेंड फार्म्स व अन्य रसीद बुक, एक एंड्राईड मोबाईल, एक बैग में रखे फर्जी रसीदे, विभिन्न विभागों की बनी फर्जी रबर स्टाम्प की सील मुद्राएं. प्रिंटिंग प्रेस में प्रयुक्त होने वाली लोहे की टंकित अक्षरों की कीलें व बाक्स, फर्जी ड्रायविंग लायसेंस व रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाने में प्रयुक्त चिप वाले ब्लैंक कार्ड्स, परिवहन विभाग के फार्म्स, छपी रसीदबुक्स, तथा मूल रसीदो की सेम्पल प्रतियां विधिवत जप्त की गई।

आरोपी विनोद यादव जो कि मूलतः उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, उसने यहा पीथमपुर में रहते हुए, आरोपियो को चंदौली से बुलाकर अपने ढाबे के जरिये संपर्क में आने वाले ट्रक ड्रायवरों और पीथमपुर स्थित आटोमोबाईल कंपनियों ट्रांसपोर्टरों से मिली भगत कर फर्जी रसीदों, बिलों तथा अन्य कागजातों के जरिये करोड़ो रुपये के हेरफेर अभी तक किये जाने की आशंका है जिसकी पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।

साथ ही आटोमोबाईल कंपनियों के ट्रांसपोर्टरों की भूमिका की भी जाँच की जावेगी तथा आरटीओ की फर्जी रसीदें, सील मोहरे बनाने वाले व्यक्तियों की भी धरपकड़ की जावेगी।

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