ग्वालियर। जीवन में व्यक्ति को मन, वचन और शरीर के द्वारा सत्य का आचरण करना चाहिए। सत्य का संबंध केवल बोलने से ही नहीं, व्यक्ति के आचरण से भी रहता है। जिसके मन में सत्य का वास होता है, उसका चारित्र अपने आप ही शुद्ध हो जाता है। आज के इस भौतिक एवं वैज्ञानिक युग में जीवन के सुख-साधन अवश्य बढ़े हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश सत्य से मानव की आस्था गिरी है। यह विचार वात्सल्य सरोवर राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने गुरुवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आठ दिवसीय अष्टान्हिका पर्व अनुष्ठान महोत्सव में कही। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति का ऐसा विश्वास बन गया है कि झूठ के बिना उसे जीवन के विपुल सुख-साधन तथा समृद्धि प्राप्त नहीं हो सकती, इसलिए छल-कपट और धोखाधड़ी का आश्रय लेकर वह अपने अभीष्ट उद्देश्यों की पूर्ति में लगा रहता है। मुनिश्री ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसीलिए आज परेशानियां दिखाई देती हैं और सर्वत्र अन्याय तथा अनीति का वातावरण बना हुआ है। इस से एक नहीं, अपितु सारे दुखी हैं। मुनि ने कहा कि दुनिया के सभी महापुरुषों और धर्म ग्रन्थों ने झूठ को बुरा कहा है क्योंकि इसके परिणाम दुख और अशांति के रूप में जीवन में आते है, किंतु फिर भी व्यक्ति झूठ बोलता रहता है। झूठ बोलना व्यक्ति की दुर्बलता का ही नतीजा है। झूठ बोलने से व्यक्ति का विश्वास और उसकी साख दोनों गिरने लगते है। असत्य का मार्ग कांटों से परिपूर्ण होता है। सत्य का मार्ग सीधा, सपाट और सरल है। इस मौके पर विनय कासलीवाल, संजीव अजमेरा, योगेश बोहरा, पंकज बाकलीवाल, आदि मौजूद थे।
मुनिश्री ने मंत्रो से आदिनाथ का अभिषेक कराया जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आयोजक आर्शमय पावन वर्षायोग समिति 2020 ग्वालियर एवं जैन मिलन ग्वालियर की ओर से चम्पाबाग धर्मशाला, नई सड़क पर वात्सल्य सरोवर मुनिश्री विहर्ष सागर जी महाराज अपने मुख्यबिंद से मंत्रो का उच्चारण के साथ आठ दिवसीय अष्टान्हिका पर्व अनुष्ठान में भक्तिमय संगीत के साथ भगवान आदिनाथ का अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया गया। वही शांतिधारा की गई! अभिषेक के उपरांत अर्घ्य समर्पित किए गए। वही प्रातः मुनिश्री ने मंत्रो के साथ कोरोना महामारी समाप्ति ओर विश्वशांति की कामनाये के लिए अग्निकुंड में जैन समाज के लोगो ने आहुतिया दी गई।
