झाबुआ ! झाबुआ में हुए हादसे में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की वजह विस्फोटक का होना सामने आ रही है, यह बात अलग है कि सरकार और पुलिस जांच की बात कहकर इस हकीकत पर पर्दा डालने की कोशिश में लगी है।
पेटलावाद के लोगों के लिए शनिवार की सुबह काल बनकर आई और उसने कुछ ही सेकेंडों में कई परिवारों की हंसती खेलती जिंदगी में मातम ला दिया। न्यू बस स्टैंड के इलाके में शनिवार की सुबह भी सब कुछ आम दिनों की ही तरह था, कोई सेठिया दुकान पर चाय नाश्ता कर रहा था तो कोई अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए वाहन के इंतजार में था। इनमें मजदूरों से लेकर स्कूली बच्चे तक थे, वहीं घरों के भीतर मौजूद लोग अपने काम में जुटे थे।
कुल मिलाकर पेटलावाद में सबकुछ आम दिनों की तरह था, मगर जब घड़ी की सुई लगभग साढ़े आठ पर पहुंची, तभी एक नहीं दो धमाके हुए और सारा इलाका चीत्कार में बदल गया। हर तरफ सिर्फ मानव शरीर के अवशेष और सड़क पर पड़े घायल व कबाड़ में बदल चुके वाहन ही नजर आ रहे थे। दूसरी तरफ मलबे में बदल चुके मकानों में कई परिवार दब गए। हादसे की खबर आते ही सरकार यह बताने पर तुल जाती है कि गैस सिलेंडर फटने से यह हादसा हुआ है।
दिन चढ़ने के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह मान लेते हैं कि हादसे को लेकर दो बातें आ रही हैं, मगर क्या सामने आ रहा है यह बताने से इंकार कर दिया और जांच का एलान किया।
हर तरफ सवाल उठने लगे कि गैस सिलेंडर के विस्फोट से इस तरह का हादसा नहीं हो सकता तो पुलिस के अफसर झाबुआ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीमा अलवा भी मानती हैं कि इस विस्फोट में जिलेटिन हो सकता है। जिलाधिकारी अरुणा गुप्ता ने तो डेटोनेटर मिलने की बात भी स्वीकार की है।
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने तो इस हादसे की वजह ही स्थानीय लोगों के हवाले से विस्फोटक के अवैध भंडार को बताया है। उनका कहना है कि जिसने अवैध भंडार किया था वह भाजपा का नेता है और सरकार व प्रशासन उसे बचाते आ रहे हैं।
हादसे की वजह जो सामने आ रही है उससे यह बात साफ है कि अगर विस्फोटक का अवैध भंडार नहीं होता तो इस हादसे में मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा नहीं होती।

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