इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में अमानत में ख्यानत के मामले को रफा-दफा करने 25 हजार की रिश्वत मांगने वाले पुलिस के उपनिरीक्षक को न्यायालय ने 4 साल की सजा सुनाई है। लोकायुक्त द्वारा उप निरीक्षक को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद लोकायुक्त ने जिला न्यायालय में चालान पेश किया जिसमें न्यायालय द्वारा उप निरीक्षक अजय पल्लेय निवासी सुदामा नगर को दोषी पाते हुए 4 साल का कारावास व 5 हजार रुपए दंड की सजा सुनाई गई है। प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी जीपी घाटिया विशेष लोक अभियोजक ने की। उन्होंने तर्क किया व उपधारणा के संबंध में ध्यान आकर्षित कराते हुए निवेदन किया कि अभियुक्त द्वारा फरियादी को अमानत में खयानत संबंधी शिकायत एवं धारा 420 भादवि की कार्रवाई के लिए धमकाया। आरोपी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करना गंभीरतम अपराध की श्रेणी में है, इसलिए अभियुक्त को कठोरतम दंड देने का निवेदन किया गया।
अभियोजन के अनुसार 27 अक्टूबर 2015 से 30 अक्टूबर 2015 के मध्य पुलिस थाना सेन्ट्रल कोतवाली, इंदौर में उप-निरीक्षक के पद पर लोक सेवक के रूप में पदस्थ रहते हुए फरियादी को 27 अक्टूबर 2015 को फोन कर धमकाया कि तुम्हारे और रमेश के खिलाफ अंसार अहमद ने 25 लाख रुपए की अमानत में खयानत संबंधी शिकायत की है। जिस कारण आपके बयान लेना है। दोपहर 2 से रात 8 बजे थाने पर बैठाकर धोखाधड़ी के संबंध में धमकाया एवं शिकायत रफादफा करने के एवज में 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। उसके कहने से सह अभियुक्त अमजद ने फरियादी की जेब से 5,500 रुपए जबरन निकाले एवं 20 हजार रुपए रिश्वत के लेना तय करते हुए शेष राशि 10 हजार रुपए की मांग की। फरियादी ने समय मांगा, उसी बीच 29 अक्टूबर 2015 को अमजद पठान फरियादी की दुकान पर गया एवं 30 अक्टूबर को अमजद के माध्यम से 9 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इस प्रकार आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर आपराधिक षड्यंत्र के तहत कदाचरण का अपराध किया। आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया गया था।
