भोपाल . जनजातीय गौरव दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलग ही रंग में रंगे हुए नजर आए. उन्होंने आदिवासियों की पारंपरिक जैकेट और साफा पहना. इस मौके पर उन्हें झाबुआ से बुलाई गई ‘झुलड़ी’ पहनाई गई. झुलड़ी को आदिवासी महिला ने अपने हाथों से खासतौर से उनके लिए तैयार किया. उन्हें ये झुलड़ी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे ने पहनाई.
गौरतलब है कि इस जैकेट को बहन सुभद्रा ने तैयार किया है. इस जैकेट के ऊपरी हिस्से की डिजाइन हाथों से धागों का इस्तेमाल करते हुए बनाया जाता है. उसके बाद मशीन पर काम किया जाता है. इसे बनाने में ढाई से 3 घंटे का समय लगता है. बता दें, झुलड़ी झाबुआ जिले और आसपास के आदिवासी इलाकों का प्रमुख परिधान है. मुख्य रूप से ये काले और नीले रंग में बनाई जाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जोबट से आदिवासी समुदाय का तीर-धनुष भी राजधानी भोपाल लाया गया. तीर-धनुष आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की पहचान है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधन की शुरुआत जनजातीय बोली से की और राम-राम कहा. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछली सरकार के लिए आदिवासी समाज का विकास कोई मायने नहीं रखता था. लेकिन, अब उन्हें गौरव और सम्मान दिलाया जाएगा. उन्होंने घोषणा की कि अब हर साल भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि अभी हाल में पद्म पुरस्कार दिए गए हैं. जनजातीय समाज से आने वाले साथी जब राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो दुनिया हैरान रह गई. आदिवासी और ग्रामीण समाज में काम करने वाले ये देश के असली हीरे हैं. पीएम मोदी जंबूरी मैदान के कार्यक्रम के बाद सड़क मार्ग से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पहुंचे.
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का उन्होंने लोकार्पण किया. इस दौरान उनकी झलक पाने को लोग दीवाने हुए जा रहे थे. पीएम का काफिला कुछ देर होशंगाबाद रोड पर रुका और रानी कमलापति स्टेशन की धीरे-धीरे चलने लगा. जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम स्थल पर मुस्लिम महिलाएं भी बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं. उन्होंने यहां हर हर मोदी-घर घर मोदी के नारे लगाए. इसके अलावा उन्होंने ट्रिपल तलाक कानून के लिए उन्हें शुक्रिया कहा.
