मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में आदिवासी बहुल इलाकों में होली पर्व भगोरिया के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर आदिवासी अंचलों में भगोरिया मेले आयोजन होता है, जहां युवक अपने प्यार का इजहार लड़की को पान खिलाकर करता है।

इस साल होलिका दहन 17 मार्च को होगा और धुलेंडी 18 मार्च को खेली जाएगी। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में भगोरिया मेला हर साल उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस मेले को देखने को लिए कई विदेशी पर्यटक भी आते हैं। भगोरिया मेले की खास बात ये है कि आदिवासी समुदाय के युवक एक खास अंदाज में युवतियों से अपने प्यार का इजहार करते हैं। इस भगोरिया पर्व से जुड़ी खास रस्मों को निभाते हैं।

भगोरिया मेले में आदिवासी समुदाय के हजारों लोग हिस्सा लेते हैं। मेले में कोई युवक किसी लड़की को पान पेश करता है और लड़की उस पान को खा लेती है तो इसका मतलब है कि लड़की भी लड़के को पसंद करती है। इसके बाद दोनों मेले से भाग जाते हैं। इसके बाद वे तब तक घर वापस नहीं आते हैं, जब तक वे उनके माता-पिता उनकी शादी के लिए तैयार नहीं हो जाते हैं। आदिवासी अंचलों में यह मेला प्राचीन काल के स्वयंवर का ही मिलता-जुलता प्रतिरूप है।
मान्यता के अनुसार, भगोरिया मेले की शुरुआत दो भील राजाओं कसुमार और बालुन के समय से मानी जाती है, जिसमें इन दोनों राजाओं ने मिलकर अपनी राजधानी भगोरा में एक मेले का आयोजन किया था। इसके बाद अन्य राजा लगातार इस मेले का आयोजन करने आए और आज यह एक रिवाज बन गया है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि भील समाज में लड़के पक्ष को शादी के लिए लड़कियों को दहेज देना पड़ता था और इससे बचने के लिए भगोरिया मेले का आयोजन शुरू किया गया, जिसमें लड़के-लड़कियों की बिना पैसे के शादी कर दी जाती है।
भगोरिया मेला आदिवासी अंचलों में करीब 4 से 5 दिनों के लिए आयोजित किया जाता है। इस मेले के आयोजन में सरकार और स्थानीय प्रशासन भी सहायता करता है। भगोरिया मेले को लेकर युवक-युवतियों में खासा उत्साह रहता है। इस दौरान युवाओं को अपना जीवन साथी चुनने की पूरी आजादी होती है।
