मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधान सभा का चुनाव होना है। इसको लेकर सभी राजनीतिक दल अपना जोर अजमाने में लगे हैं। इसी बीच बजट सत्र मंगलवार से अनिश्चित कालीन के लिए स्थिगित कर दी गई है। इस बजट सत्र मे आम जन के लिए कई मुद्दों पर चर्चा चली। इसी के चलते एमपी के नगरीय क्षेत्रों में 31 दिसंबर 2020 तक सरकारी भूमि पर काबिज हुए लोगों को सरकार अब आवासीय पट्टा देगी। बजट सत्र के आखिरी दिन नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने विधानसभा में मप्र नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना)’ अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक प्रस्तुत किया, इसके साथ तीन अन्य विधेयक बगैर चर्चा के पारित हो गए।

इस समय विपक्ष की ओर से सिर्फ आरिफ अकील सदन में थे। इसके तुरंत बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। बता दें कि विधानसभा का बजट सत्र 27 फरवरी से प्रारंभ हुआ था, जो 27 मार्च तक चलना था।

अभी तक क्या थी योजना

बता दें अभी तक प्रदेश में 31 दिसंबर 2014 तक सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को भूमि का पट्टा देने का नियम है। सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए पात्रता अवधि बढ़ाई है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति के बाद यह नियम लागू कर दिए जाएंगे और फिर से सर्वे कर पात्रों को उस भूमि के पट्टे बांटे जाएंगे, जिस पर वे काबिज हैं।

इसके योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें साक्ष्य के रूप में राशन कार्ड, मोहल्ला समिति का लिखित प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। ऐसे व्यक्तियों को नगर पंचायत क्षेत्र में सौ वर्गमीटर, नगरपालिका में 80 वर्गमीटर, राजभोगी नगरों से विभिन्न नगरों की सीमाओं के भीतर 70 वर्गमीटर और राजभोगी नगरों की सीमाओं में 60 वर्गमीटर की पात्रता रहेगी।

विधानसभा ने नगर पालिक विधि (संशोधन) विधेयक भी पारित कर दिया है। अब शौचालय न बनाने पर पांच हजार रुपये एकमुश्त और फिर दो सौ रुपये प्रति दिन की दर से जुर्माना देना होगा। सरकार ने उन धाराओं को हटा दिया है, जिसमें शौचालय न बनाने पर कारावास की सजा का प्रविधान है। वहीं शवयात्रा के लिए रास्ता निर्धारित करने के नियम को भी खत्म  कर दिया गया है।