इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के हुकुमचंद चिकित्सालय में (पीजीएमओ नेत्ररोग) चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ और वर्तमान में निलंबित चल रहे डॉ. आनंद राय को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई राय पर आठ आरोपों की जांच के बाद नौकरी में कदाचरण को लेकर की गई। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की तरफ से सोमवार को आदेश जारी किए गए। विभाग की तरफ से मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम-1966 के तहत कार्रवाई की गई है। इस पर डॉ. आनंद राय ने कहा कि मैं भ्रष्टाचार के मामले उठा रहा था। यह मेरी अभिव्यक्ति की आजादी का हनन है। इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दूंगा।

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार राय हुकुमचंद चिकित्सालय के 29 मार्च 2022 को निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित थे, जबकि उनकी रजिस्ट्रर में दर्ज पाई गई। दूसरा 15 फरवरी से 15 मार्च 2022 के अवधि में डॉ. आनंद राय 18 दिन ही उपस्थित हुए। जबकि 6 दिन का कोई अवकाश का आवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया। अनुपस्थित रहने पर राय को मेडिकल कराने पेश होने को कहा गया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुए।

आदेश में निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी को लेकर सोशल मीडिया पर राय के पोस्ट करने का भी उल्लेख भी किया गया है। राय ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि 400 डॉक्टर्स में भोपाल से इंदौर अधिकारी उनकी और उनकी पत्नी की जांच के लिए आये है। राय पर उप संचालक स्वास्थ्य सेवाएं लीगल के संबंध में सोशल मीडिया पर मनगढंत पोस्ट करने, जून 2020 में सोशल मीडिया पर फौजी के संबंध में विवादित पोस्ट करने और शासकीय सेवा में रहते कई आपराधिक प्रकरण दर्ज होने का भी जिक्र आदेश में है।

इसके अलावा आदेश में कहा गया है कि अप्रैल 2022 में इंदौर के अस्पताल से निलंबित करने के बाद राय का मुख्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा नियत किया गया था, लेकिन वरिष्ठ कार्यालय के आदेश के बाद भी राय रीवा कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए। बता दें आनंद राय हाल ही में पेसा विकासखंड समन्वयक और जिला समन्वयक की भर्ती में घोटाले का भी आरोप लगा रहे है। उन्होंने भर्ती में आरएसएस और भाजपा पार्टी के कार्यकर्ताओं को नियुक्ति देने का आरोप लगाया है। इसके अलावा राय जयस संगठन के साथ मिलकर सरकार पर लगातार आरोप लगा रहे थे।