नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट मामले में 17 साल बाद NIA की विशेष अदालत से बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अपने जेल में बिताए गए दर्दनाक दिनों को याद किया और कहा कि उन्हें इतना अत्याचार सहना पड़ा कि वह इसे शब्दों में बयान नहीं कर सकतीं। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि ATS अधिकारियों ने उन्हें 13 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा और इस दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
“मोदी, योगी और अन्य का नाम लेने के लिए दबाव डाला गया”
साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ, मोहन भागवत, और अन्य हिंदू नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव डाला गया था। उन्होंने बताया, “मुझे कहा गया कि यदि तुम इन लोगों का नाम लोगी तो हमें तुम्हें छोड़ देना होगा। उनका मुख्य उद्देश्य मुझे परेशान करना और असत्य बोलवाना था, लेकिन मैंने किसी का नाम नहीं लिया।”
“मुझे असत्य बोलने के लिए दबाव डाला गया, लेकिन मैं नहीं झुकी”
प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि उन पर बहुत ज्यादा दबाव डाला गया था, लेकिन वह कभी भी असत्य बोलने को तैयार नहीं हुईं। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा सत्य का साथ दिया, और कोई भी ताकत मुझे असत्य बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकी।” उन्होंने इस दौरान जेल में मिले मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के बारे में भी विस्तार से बताया।
“भगवा और हिंदू धर्म को बदनाम करने का था कुत्सित प्रयास”
साध्वी प्रज्ञा ने कोर्ट के फैसले को भगवा धर्म और सनातन धर्म की जीत बताया। उनका कहना था, “इस पूरे मामले में भगवा और हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश की गई थी। लेकिन सत्य सामने आया और हम इस साजिश को नष्ट करने में सफल हुए।” उन्होंने यह भी कहा कि अब वह उन लोगों के खिलाफ दंड प्रक्रिया शुरू करेंगी जिन्होंने इस मामले में उनके खिलाफ गलत आरोप लगाए थे।
“यह मामला पूरी तरह से गढ़ा हुआ था”
साध्वी प्रज्ञा ने इस मामले को पूरी तरह से झूठा और गढ़ा हुआ बताया और कहा कि अदालत के फैसले से यह सिद्ध हो गया कि यह केस बिना किसी ठोस आधार के था। उनका कहना था, “सत्य सामने आता है और इस केस में भी ऐसा ही हुआ। यह पूरी प्रक्रिया हिंदू धर्म और भगवा को बदनाम करने के उद्देश्य से की गई थी।”
