सागर । जैन समाज इन दिनों अपने ही जैन मुनियों और आचार्य के खिलाफ समाज के लोगों द्वारा की जा रही अभद्र टिप्पणियां से नाराज है। हाल ही में अशोकनगर में आयोजित जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम के दौरान समाज के संतोष पटना द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को लेकर कीगईं रिप्पणी से अब तीव्र विरोध सामने आने लगा है। यह टिप्पणी जगत पूज्य निर्यापक सुधासागर महाराज की उपस्थिति में की गई। जिसे समाजजनों ने अत्यंत आपत्तिजनक माना है।

इसी महीने की  16 अगस्त को सागर के एक व्यवसाई संतोष जैन पटना वालों ने अशोकनगर के धार्मिक मंच से,जन जन के आराध्य संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रति अनर्गल एवं आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।  इतना ही नहीं उन्होंने वर्तमान आचार्य 108 श्री समय सागर जी महाराज एवं अन्य 9 निर्यापकाचार्य के प्रति भी घोर निन्दाजनक शब्दों का प्रयोग किया।  उनके साथ खड़े लोगों ने हंसकर एवं तालियां बजाकर उस कृत्य की अनुमोदना की । मंच पर विराजमान महावृति द्वारा भी इनका उत्साहवर्धन किया गया । जैन दर्शन में आम श्रद्धालुओं द्वारा महावृति के विरुद्ध कोई शब्द तक नहीं बोला जाता,परंतु संतोष जैन द्वारा की गई टिप्पणी अस्वीकार्य है। इसके विरोध में जैन समाज द्वारा इसकी निंदा हो रही है। और अनेक जगह प्रदर्शन भी हो रहे है। सागर जिले के बंडा में कल सोमवार की रात में पुतला दहन संतोष पटना का किया गया। 

सागर में महिलाएं तक उतरी मैदान में

सकल जैन समाज सागर द्वारा आज मंगलवार को  विरोध स्वरूप सड़कों पर उतरकर संतोष जैन पटना के पुतले पर कालिख पोतकर एवं जूतों की माला पहनाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।सागर की जैन समाज मांग करती है कि संतोष जैन को सभी पदों से बर्खास्त किया जाए एवं इनका सामाजिक बहिष्कार हो,यदि इनके द्वारा अशोकनगर के उसी धार्मिक मंच से माफी मांगी जाये।