शिमला: हिमाचल प्रदेश एक बार फिर भयंकर मानसूनी तबाही की चपेट में है। राज्य में सोमवार की रात को 17 जगह बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 15 घटनाएं मंडी जिले में, जबकि कुल्लू और किन्नौर में एक-एक जगह बादल फटा। इन आपदाओं में अभी तक 18 लोगों की मौत, 33 लोग लापता, दर्जनों घायल है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 20 जून से 1 जुलाई के बीच बारिश से जुड़ी घटनाओं में 51 लोगों की जान गई है, जबकि 103 लोग घायल हुए हैं। इस अवधि में 55 मकान, 9 दुकानें और 45 गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। अब तक करीब 356.67 करोड़ रुपये से अधिक का नुक्सान आंकलित किया गया है। मंडी जिला इस समय सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।

सोमवार रात बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। मंडी जिले में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 34 लोग लापता हैं। थुनाग, गोहर, करसोग, धार जरोल और पांदव शिला क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 370 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। आपदा से मंडी में 24 मकान, 12 पशुशालाएं और एक पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 30 मवेशियों की मौत भी हुई है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय टीमें लगातार राहत व बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।

थुनाग उपमंडल में सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उपायुक्त ने रक्षा मंत्रलय और भारतीय वायुसेना से हवाई मदद मांगी है ताकि राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। वायुसेना के जरिए राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। केलोधार में मकान गिरने से फंसे 8 लोगों को, वहीं करसोग की इमला खड्ड से 7 ग्रामीणों को रेस्क्यू किया गया। करसोग कॉलेज से 12 छात्रों और 4 महिलाओं को भी बाढ़ के बीच सुरक्षित निकाला गया।