जयपुर। कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही एक बार फिर से राजस्थान कांग्रेस में भी राजनितिक उठक पटक वाली आशंकाएं तेज हो गई हैं। जहां कांग्रेस महासचिव और वरिष्ठ नेता भंवर जितेन्द्र ने सचिन पायलट को दिए आश्वासन को पूरा करने की मांग की है, वहीं कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी सरकार पर ख़तरा आने की आशंकाओं यह कहते हुए विराम देने की कोशिश की है कि फिलहाल सबकी प्राथमिकता कोरोना के बाद अब जीवन को पटरी पर लाने की है। वक़्त आने पर सबकी भावनाओं का सम्मान होगा।

11 जून की तारीख के नजदीक आने के साथ ही राजस्थान में राजनितिक हलचल और सरकार पर संभावित खतरे की आशंकाओं वाली ख़बरें फिर से सुर्खियां बनने लगी हैं। पिछले साल का यह वही दिन था जब अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के सामने अपने पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर समर्थक विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया था। उसके बाद करीब 50 दिन तक सरकार को अपने सभी विधायाको को होटल में रखकर सत्ता पर आये इस संकट को दूर करना पड़ा।

इस बार जहां एक बार फिर से पायलेट समर्थकों द्वारा 11 जून को ही शक्ति प्रदर्शन की ख़बरें सामने आ रही हैं वहीं कांग्रेस के बड़े नेता जितिन प्रसाद के बीजेपी का दामन थाम लेने के बाद इन अटकलों को और भी हवा मिल गई है। ऐसे में पार्टी के राष्ट्रिय महासचिव भंवर जितेन्द्र सिंह का सचिन पायलेट के समर्थन में दिया बयान भी सबको चौंका रहा है।

अपने इस बयान में भंवर जितेन्द्र ने कहा है कि हाईकमान ने यदि पायलट से कोई वादा किया है तो उसे जरूर पूरा करना चाहिए, ताकि पायलेट अपने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर सकें। हालांकि लगे हाथों भंवर जितेन्द्र ने राजस्थान सरकार को किसी भी तरह के खतरे की आशंका से भी इनकार कर दिया।

वैसे खुद पायलट भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि पार्टी के लिए संघर्ष करके उसे सत्ता में लाने वालों को राजनितिक नियुक्तियां और मंत्रिमंडल विस्तार में पूरी तवज्जो दी जानी चाहिए। ऐसे में अब पायलट कैम्प के कई विधायक भी अब और खुलकर बयानबाजी पर उतर आए हैं। यहां तक कि सरकार के खिलाफ खुलकर अनुसूचित जाति के लोगों की उपेक्षा और अपनी ही सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के खिलाफ बयान भी दे रहे हैं।

पायलेट समर्थक कांग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा, मैंने कब कहा मेरे इलाके में विकास के काम नहीं हो रहे हैं। जहां भी जाना पड़ता है जा रहा हूं, लेकिन हम जिस सीट से जीतकर आये हैं उस इलाके के लोगों के लिए क्या कर रहे हैं? जो कमेटियां बनी है उसमें सुभाष गर्ग जैसे मंत्री हैं जोकि अनुसिचित जाति के लोगों के खिलाफ फैसले करवा लाते हैं।

अपनी पार्टी की सरकार के पक्ष में खड़े मंत्री और विधायक पार्टी के अन्दर की खींचतान को जानते- समझते तो अच्छी तरह से हैं लेकिन इसके समाधान के लिए सही वक़्त के इंतजार की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। जहां कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास इसे हाई कमान के लेवल वाला मामला बता रहे हैं वहीं मुख्य सचेतक महेश जोशी की माने तो जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल हो जाने जैसी छोटी घटनाओं का असर राजस्थान में कहीं देखने को नहीं मिलेगा।

केबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि यह हाई कमान, सीएम गहलोत और पार्टी प्रभारी अजय माकन के लेवल के फैसले हैं। अभी हम सबकी प्राथमिकता कोरोना से जंग लड़कर आम लोगों को राहत देने की है। वैसे इस पर बात करने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं, ये हमारे पार्टी परिवार के मामले हैं आपस में मिल बैठकर सुलझा लेंगे, एसी बातें तो चलती रहती हैं। सरकार चलाने में हमे कोई दिक्कत नहीं आएगी। मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा, जितिन प्रसाद के जाने का किसी पर कोई असर नहीं होने वाला है। उन्हें कांग्रेस ने सब कुछ दिया था। राजस्थान की सरकार पर कोई ख़तरा नहीं है।

बहरहाल इस मुद्दे पर जिस तरह से कई बयान और खबरें सामने आ रही हैं। वह इस बात की आहट कही जा सकती है कि 11 जून को फिर से पायलेट केम्प शक्ति प्रदर्शन करके हाई कमान के सामने अपनी ही सरकार पर संकट के बादल दर्शाने की कोशिश करेगा या फिर इस बार जितिन प्रसाद के नाम पर अपनी मांगे मनवाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश करेगा। वैसे सचिन केम्प के विधायकों के सामने यह संकट हैं कि गुज्जर बाहुल्य इलाके में स्थित राजेश पायलट की प्रतिमा के सामने होने वाले कार्यक्रम में शरीक होना उनकी मजबूरी है। उनके समर्थक इसी मौके को जाने अनजाने ही सही लेकिन शक्ति प्रदर्शन का जरिया अभी बना लेते हैं।

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