कटनी।  रिश्वतखोरी के आरोप में राजस्व निरीक्षक राजकुमार खरे पर आरोप सिद्ध। विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कटनी ने सुनाई चार साल की सजा और लगाया 20 हजार रुपये का जुर्माना।

मामला 20 जनवरी 2015 का है, जब सावरकर वार्ड निवासी सुशील जैन ने खुद व अपनी मां के नाम से ईंट उद्योग शुरू करना चाहते थे। इसके लिए उन्होने मां के नाम की जमीन का भू उपयोग परिवर्तन कराने के लिए डायवर्जन शाखा में आवेदन किया। आरोप लगा कि राजस्व निरीक्षक राजकुमार ने भू उपयोग परिवर्तन के लिए आठ हजार रुपये की रिश्वत मांगी। लेकिन सुशील इसके लिए तैयार नहीं थे।

लिहाज सुशील ने इसकी शिकायत लोकायुक्त से की। इस शिकायत को संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त ने ट्रैपिंग टीम के निरीक्षक राजीव गुप्ता को कार्रवाई के लिए लगाया। राजीव गुप्त ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना बनाई। घटना के तीन दिन बाद यानी 23 जनवरी को ट्रैपिंग रणनीति को अंजाम दिया गया। इसके तहत 23 जनवरी को राजस्व निरीक्षक राजकुमार को आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

उस मामले में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त ने मामले की विवेचना के बाद अभियोग पत्र विशेष न्यायालय कटनी के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद आरोपी राजस्व निरीक्षक राजकुमार खरे को सुशील जैन से रिश्वत की मांग करने व 8 हजार रूपये की रिश्वत लेने का दोषी मानते हुए विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कटनी ने 19 जुलाई को दोष सिद्ध घोषित किया।

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