भिनेत्री श्वेता त्रिपाठी ने प्रोड्यूसर के तौर पर महिलाओं और क्वीर समुदाय की कहानियों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि यह उनके लिए सिर्फ एक पेशेवर कदम नहीं, बल्कि एक निजी और जरूरी जिम्मेदारी है। एक कलाकार के रूप में वह ऐसे काम का हिस्सा बनना चाहती हैं, जिसका समाज पर सकारात्मक असर पड़े। हाल ही में उन्होंने अपनी पहली क्वीर फिल्म मुझे जान ना कहो मेरी जान को प्रोड्यूस करने की घोषणा की। इस फिल्म में तिलोत्तमा शोम मुख्य भूमिका में हैं और यह एक संवेदनशील क्वीर प्रेम कहानी है। फिल्म इस साल फ्लोर पर जाने की उम्मीद है और श्वेता खुद भी इसमें अभिनय करती नजर आएंगी।

इससे पहले वह क्वीर प्ले Cock का निर्माण कर चुकी हैं, जो ब्रिटिश नाटककार माइक बार्टलेट का ओलिवर अवॉर्ड विजेता ड्रामा है। यह नाटक कई शहरों में मंचित हुआ और दर्शकों से इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली।

श्वेता का मानना है कि अगर समाज में बदलाव चाहिए तो उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी। उनके अनुसार, महिलाओं और क्वीर जीवन से जुड़ी कहानियां हमेशा मौजूद रही हैं, लेकिन उन्हें वह मंच और सम्मान नहीं मिला, जिसकी वे हकदार हैं। अब जब उन्हें निर्माण का अवसर मिला है, तो वह इसका इस्तेमाल सार्थक तरीके से करना चाहती हैं।
वह यह भी मानती हैं कि क्वीर कहानियां असरदार होने के लिए सनसनीखेज होना जरूरी नहीं। कई बार ये कहानियां साधारण और संवेदनशील होती हैं, जो धीरे-धीरे दिल में जगह बनाती हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो श्वेता जल्द ही मिर्जापुर-द मूवी में नजर आएंगी, जो 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और रसिका दुग्गल सहित कई पुराने और नए कलाकार नजर आएंगे।
