ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 50 लाख रुपये से अधिक की ज्वेलरी लूट के एक बेहद जटिल और चर्चित मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है. शुरुआत में जिस घटना को अज्ञात बदमाशों द्वारा अंजाम दी गई ‘डकैती’ बताया जा रहा था, वह दरअसल परिवार के ही लोगों द्वारा रची गई एक सुनियोजित और खौफनाक साजिश निकली. पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड ‘बहू’ सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लूटा गया शत-प्रतिशत माल बरामद कर लिया है.
ग्वालियर में एक महिला ने पुलिस को सूचना दी थी कि जब वह घर में अकेली थी, तब दो अज्ञात बदमाश जबरन घर में घुस आए. महिला का आरोप था कि बदमाशों ने उसके हाथ-पैर बांधकर उसे बंधक बना लिया और घर में रखी करीब 50 लाख रुपये की ज्वेलरी लूटकर मौके से फरार हो गए. इस सनसनीखेज घटना की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस की कई टीमें तुरंत जांच में जुट गईं. पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले. फुटेज में दो संदिग्ध सफेद कपड़ों में एक मोटरसाइकिल पर आते-जाते दिखाई दिए. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी के आधार पर इन संदिग्धों की गतिविधियों को ट्रेस किया और ग्वालियर से लेकर पिछोर तक उनकी लोकेशन खंगाली.
जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया. पुलिस को पता चला कि कथित लूट की पूरी कहानी ही फर्जी थी और इसे जेवर हड़पने के लिए गढ़ा गया था. जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड घर की ही बहू पिंकी थी. पिंकी ने अपने पति शुभम श्रीवास्तव के साथ मिलकर इस पूरी वारदात की योजना बनाई थी. इस साजिश को अंजाम देने में उनके साथी सोनू कौशिक और आसिफ खान भी शामिल थे.
पुलिस के मुताबिक, जो 50 लाख की ज्वेलरी लूटी हुई बताई गई थी, वह दरअसल मोनिका नामक महिला की थी. रिश्ते में पिंकी मोनिका की ननद लगती है, जबकि शुभम श्रीवास्तव मोनिका का सगा भाई है. आरोपियों ने इन्हीं पारिवारिक रिश्तों और घर की अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर इस फर्जी लूट की स्क्रिप्ट तैयार की और 50 लाख की ज्वेलरी हड़पने की साजिश रची थी.
ग्वालियर पुलिस ने अपनी त्वरित जांच क्षमता का परिचय देते हुए महज 24 घंटे में इस जटिल मामले को सुलझा लिया. पुलिस ने चारों आरोपियों (पिंकी, शुभम, सोनू और आसिफ) को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की पूरी ज्वेलरी भी सुरक्षित बरामद कर ली है.
