स्कूल एक ऐसी जगह है, जहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि संस्कार और सम्मान भी सिखाया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश से सामने आए एक वीडियो को देखकर हर कोई हैरान है। यहां सरकारी स्कूल के बच्चों को थाली या प्लेट में नहीं, बल्कि पुराने फटे कागजों पर खाना परोसा गया। यह मामला श्योपुर जिले के विजयपुर ब्लॉक के हुल्लपुर गांव के एक माध्यमिक विद्यालय का बताया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @Anurag_Dwary नाम के यूज़र ने इसका वीडियो शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो गया।

वीडियो में साफ दिखाई देता है कि छोटे-छोटे बच्चे स्कूल के आंगन में जमीन पर बैठे हैं। उनके सिर पर छत या शेड तक नहीं है। बच्चों के सामने रखे गए पुराने प्रिंटिंग और पैकिंग वाले कागजों पर ही खाना परोसा गया है। श्योपुर की तस्वीर है, मिड-डे मील रद्दी अखबार में परोसा जा रहा है
मिड-डे मील अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण टाइप कुछ हो गया है 2023 बीजेपी ने घोषणापत्र में इसमें पौष्टिक भोजन देने की बात कही थी, पौष्टिक तो दिख रहा है फिलहाल परोसा कैसे जाए ये तय हो जाता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने और बांटने की जिम्मेदारी एक स्वयं सहायता समूह के पास थी। समूह की पांच में से दो महिलाएं कुछ दिनों के लिए बाहर गई हुई थीं। बाकी तीन महिलाओं को ही पूरा काम संभालना पड़ा। समय की कमी और बर्तन धोने की परेशानी से बचने के लिए उन्होंने बच्चों को थाली की जगह फटे कागजों पर ही खाना परोस दिया।

प्रशासन की कार्रवाई

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, श्योपुर के कलेक्टर अर्पित वर्मा ने तुरंत जांच के आदेश दिए। एसडीएम की जांच में यह घटना सही पाई गई। इसके बाद कलेक्टर ने बड़ा कदम उठाते हुए उस स्वयं सहायता समूह को समाप्त कर दिया, जो मिड-डे मील बना रहा था।
साथ ही स्कूल प्रिंसिपल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा- बच्चों के सम्मान और स्वास्थ्य के साथ लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार की योजना पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर सरकार की ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना’ पर सवाल खड़े करती है। इस योजना का मकसद है कि हर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल के बच्चों को रोजाना पौष्टिक, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन दिया जाए।