मुंबई के मशहूर ताज होटल का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने ‘एटीकेट बनाम आत्मसम्मान’ की बहस को फिर से जगा दिया है। वीडियो में एक महिला का आरोप है कि होटल स्टाफ ने उनसे सिर्फ इसलिए असम्मानजनक व्यवहार किया क्योंकि वह डिनर टेबल पर पालथी मारकर बैठी थीं और पैरों में कोल्हापुरी चप्पल पहनी हुई थी।

महिला ने खुद बनाया वीडियो
महिला ने बताया कि उन्होंने वीडियो उसी समय बनाया, जब होटल के मैनेजर ने उनके बैठने के तरीके पर आपत्ति जताई। इसके बाद उन्होंने यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर कर दिया। कुछ ही घंटों में वीडियो वायरल हो गया और लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
एक आम इंसान, जो मेहनत करके, अपना पैसा कमा कर, अपनी इज़्ज़त के साथ ताज होटल में आता है — उसे आज भी इस देश में ज़लील और अपमानित होना पड़ता है।
और मेरी गलती क्या है? सिर्फ़ ये कि मैं बैठ गई एक “regular padmasana style” में?
क्या ये मेरी गलती है कि ताज मुझे सिखा रहा है कि कैसे बैठना…मैंने मेहनत से पैसे कमाए हैं, अपमान क्यों?
वीडियो में महिला कहती नजर आती हैं कि मैं मेहनत से पैसे कमाती हूं। आज मैं अपनी बहन के साथ डिनर के लिए ताज होटल आई थी। लेकिन यहां मुझे कहा गया कि मैं इस तरह नहीं बैठ सकती क्योंकि यह फाइन डाइनिंग जगह है। होटल मैनेजर ने बताया कि एक अमीर गेस्ट को मेरे बैठने के तरीके से दिक्कत है। महिला उस वक्त कुर्सी पर पैर मोड़कर पालथी मारकर बैठी थीं, जो भारत में एक सामान्य और आरामदायक बैठने का तरीका माना जाता है।
यह ताज होटल है, यहां क्लास दिखनी चाहिए
महिला के मुताबिक, होटल के मैनेजर ने कहा कि ताज में रिच गेस्ट आते हैं और यहां कुछ ड्रेस और सिटिंग एटीकेट फॉलो करने पड़ते हैं। पैर नीचे रखकर बैठें और क्लोज फुटवियर पहनें, क्योंकि यह जगह ‘फाइन डाइनिंग एरिया’ है।
इस पर महिला ने कैमरे के सामने कहा कि क्या कोल्हापुरी चप्पल पहनने से मैं किसी से कम हो जाती हूं? मैंने इन्हें अपनी मेहनत से खरीदा है, किसी की मेहरबानी से नहीं। अगर यह जगह सिर्फ अमीरों के लिए है, तो क्या आम लोगों को यहां आने का हक नहीं?
मैंने मर्यादित कपड़े पहने थे, फिर समस्या क्या
महिला ने बताया कि उन्होंने उस दिन सलवार-कुर्ती पहनी थी, जो पूरी तरह पारंपरिक और शालीन ड्रेस है। उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ किसी के बैठने के तरीके या पहनावे से किसी की क्लास या संस्कृति कैसे तय की जा सकती है। मैं रतन टाटा जी की बहुत इज्जत करती हूं, हमारी कंपनी में वे इनवेस्टर हैं। लेकिन ताज होटल के इस रवैये से मुझे बहुत दुख हुआ है। अगर ताज जैसा बड़ा ब्रांड भी किसी की इज्जत उसके कपड़ों या बैठने के अंदाज़ से मापेगा, तो फिर आम लोगों के लिए जगह कहां बचेगी?
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने महिला का समर्थन करते हुए लिखा- कपड़े या बैठने का तरीका इंसान की कीमत तय नहीं कर सकता। वहीं कुछ यूजर्स ने ताज होटल के पक्ष में कहा, हर फाइन डाइनिंग जगह के अपने नियम होते हैं, जिनका पालन मेहमानों को करना चाहिए।
