इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के धार जिले के मनावर के गांव खिरकिया में बडी संख्या में मौजूद लोगों ने 2 कार में सवार 7 लोगों को घेर लिया। उन्मादी भीड ने बच्चा चोर कहकर कारों पर पथराव किया और कार सवार लोगों के साथ जमकर मारपीट की। एक कार में आग लगा दी गई। पीडितों को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया। पथराव और मारपीट से एक किसान की मौत हो गई और छह घायल हो गए। चार की हालत गंभीर होने से उन्हें इंदौर रेफर किया गया है। पुलिस के पहुंचने पर भी ग्रामीणों ने मारपीट नहीं रोकी। लोगों को खदेडने के लिए आंसू गैस के गोले छोडना पडे। पुलिस ने कुछ नामजद के साथ बडी संख्या में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
दरअसल, पूरा मामला खेत में मजदूरी के लिए दी गई अग्रिम राशि से जुडा बताया जाता है। खेडागांव तहसील सांवेर (इंदौर) के छह किसानों ने छह माह पहले खेत में मजदूरी के लिए तिरला ब्लॉक के गांव खिरकिया के अवतार, जामसिंह, महेश, राजेश और सुनील को काम के अग्रिम के तौर 50-50 हजार रुपए (कुल ढाई लाख रुपए) दिए थे। बाद में पांचों मजदूरी करने की बजाए गुजरात चले गए। बुधवार को गांव खिरकिया के मजदूरों के बुलाने पर ही सांवेर तहसील के सात किसान दो कारों में सवार होकर खिरकिया पहुंचे। गांव में पहुंचते ही 15- 20 ग्रामीणों ने उनका रास्ता रोका और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इस पर सभी जान बचाकर भागे। इस बीच ग्रामीणों ने आसपास के गांवों में खबर फैला दी कि दो वाहनों में कुछ लोग दो बच्चों का अपहरण कर भागे हैं।
घटना से दहशत में पुलिस भी एक घंटे बाद पहुंची पुलिस को भारी भीड और आक्रोश की जानकारी मिल गई थी। बाद में पहुंची पुलिस ने आंसू गैस छोडकर भीड को तितर-बितर किया। कार सवारों के साथ खिरकिया ग्राम का मजदूर मुकेश भी था, जो लापता बताया गया है। घटना के मामले में अवतारसिंह, भुवानसिंह और जामसिंह सहित 40-45 के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और बलवा का प्रकरण दर्ज किया गया है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
मनावर की घटना को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उधर, गृह मंत्री बाला बच्चन का कहना है कि पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की जानकारी ली है। पैसे के लेन-देन को लेकर आपसी विवाद में घटना हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कानून व्यवस्था प्रदेश में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कानून का डर समाप्त हो गया है।
