चंबल नदी से ग्वालियर के लिए पानी लाए जाने की महत्वपूर्ण योजना पर वन विभाग द्वारा लगाए गए अड़ंगे का समाधान खोजने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ व पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अफसरों के साथ बैठक करेंगे। ग्वालियर और मुरैना के अफसरों के साथ ये बैठक भोपाल में होगी। वन विभाग ने चंबल नदी से ग्वालियर को पानी दिए जाने पर ये कहते हुए आपत्ति लगाई है कि नदी में पानी का बहाव आवश्यकता से कम है ओर यदि ऐसे में पानी लिया गया तो घडियाल मर जाएंगे। वन विभाग की इस आपत्ति के बाद प्रोजेक्ट पर बढ रहा काम अटक गया है और बीते दिनों हुई बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तय किया कि इसका निपटारा मुख्यमंत्री के सामने वन विभाग के अफसरों को बिठाकर किया जाएगा। ये बैठक अगले हफ्ते तक होने की उम्मीद है।

मामले में ग्वालियर कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कहा, वन विभाग ने चंबल नदी से पानी लेने से वन्य प्राणियों की जान को खतरा बताया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा भोपाल में इसके लिए ग्वालियर, मुरैना के अफसरों की बैठक ली जाएगी। इसमें समस्या का समाधान निकाला जाएगा।

चंबल नदी से पानी लाने के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट के लिए एनसीआर बोर्ड ने अप्रैल 2018 में लोन की स्वीकृति दी थी, लेकिन प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया है। प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए सबसे जरुरी एनओसी वन विभाग की है। वन मंत्री और ग्वालियर के प्रभारी उमंग सिंघार ने हर बैठक में अफसरों को एनओसी देने के निर्देश दिए हैं लेकिन एनओसी नहीं मिली।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चंबल नदी में पानी का बहाव 68 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड है, जो कम है। क्योंकि, 200 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड से कम बहाव पर घडियाल और डॉल्फिन मर जाएंगे। जबकि न तो सामान्य तौर पर नदी का बहाव 200 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड होता है और न अभी है। फिर भी राजस्थान सरकार द्वारा कोटा, करौली के लिए पर्याप्त पानी लिया जा रहा है। ग्वालियर के लिए 1.75 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड बहाव के पानी की जरूरत है। गर्मी में नदी में पानी का स्तर कम रहता है तो इससे पहले और इसके बाद तिघरा को भरा जा सकता है। इन महीनों के अलावा चंबल से पानी लाने का विकल्प हो सकता है।

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