इंदौर। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी इंदौर संभाग के बुरहानपुर में एक शादी समारोह में दूल्हा मण्डप में बैठा रहा और दुल्हन ने घोडी पर बैठकर बारात निकाली और दूल्हें से साथ मण्डप में सात फेरे लिए। नौकरियों से लेकर हर क्षेत्र में जब महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिल चुका है तब भला शादियों में घोडी चढने से महिलाएं कैसे पीछे रह सकती हैं। ऐसी ही एक अनूठी बारात सोमवार को बुरहानपुर शहर में निकली। गुजराती समाज की दुल्हन अंशुल मुंशी की शानो शौकत से घोडी पर बारात निकाली गई। शनि मंदिर के पास से डीजे और बैंड की धुन पर निकली यह बरात फव्वारा चौक, कमल टॉकीज, पांडुमल चौराहा होते हुए नागरवाडी पहुंची। यहां दूल्हा अपेक्षित शाह को दुल्हन ने ब्याह के लिए न्योता दिया। गुजराती समाज के अध्यक्ष कमलेश शाह ने बताया कि समाज में यह परंपरा करीब तीन सौ साल पुरानी है, लेकिन बीते कुछ सालों में इसका चलन घट रहा था। इस परंपरा को पुनः स्थापित करने की फिर शुरुआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अपने समाज सहित अन्य लोगों को बेटा-बेटी के बीच समान व्यवहार का संदेश देना है।
इस शादी की एक खास बात यह भी है कि इसमें प्लास्टिक और कागज के उपयोग को भी कम किया गया है। इसी के चलते शादी के निमंत्रण पत्र भी रुमाल और कपडे की थैलियों पर छपवा कर बांटे गए। ज्ञात हो कि दूल्हा बने अपेक्षित नेपानगर निवासी विजय शाह के बेटे हैं और अमेरिका में एप्पल कंपनी में इंजीनियर हैं। उनका कहना था कि पर्यावरण को बचाने के लिए इस तरह के छोटे-छोटे प्रयास सभी को करने चाहिए। इसकी चर्चा वे अमेरिका लौटने पर एप्पल के दफ्तर में भी करेंगे। इसी तरह डेंटिस्ट दुल्हन अंशुल ने भी समाज और परिवार के प्रयासों को बेटियों को प्रोत्साहित करने वाला बताया। दूल्हे के पिता विजय शाह इससे पहले भी अपनी एक बेटी की शादी में इसी तरह के पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रयास कर चुके हैं।
