इंदौर। मप्र की धार जिले की पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है जिसमे उसने एक निर्दोष दलित वृद्ध को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हाई कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्दोष को तत्काल जेल से रिहा करने व मप्र सरकार को उसे तीस दिन में 5 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं वही सम्बंधित एसडीओपी मनोहर सिंह बारिया व अन्य पर अवमानना का केस दर्ज करने के आदेश भी दिए है।

जस्टिस एससी शर्मा व जस्टिस शैलेन्द्र शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कमलेश की ओर से एडवोकेट देवेंद्र चौहान व सचिन पटेल द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर उक्त आदेश दिए।
मामला इस प्रकार है कि हत्या के प्रकरण में किसी हुस्ना नामक व्यक्ति को सजा हुई थी और वह पैरोल पर छूटा था।

पैरोल पर रिहा होने के दौरान ही उसकी मौत हो गई। इस बीच उसके वापस जेल ना पहुंचने पर उसका वारंट निकल गया। इस पर मप्र के धार जिले के बाग पुलिस ने याचिकाकर्ता कमलेश के पिता हुसान (पिता रामसिंग) को हुस्ना बताकर गिरफ्तार किया और कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। वह करीब 4 माह से इंदौर जेल में ही है।

कमलेश ने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई कि उसका पिता निर्दोष है और उसका हत्या से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में उक्त याचिका लगाई। शासन की ओर से पेश जवाब में एसडीओपी मनोहर सिंह बारिया ने भी कोर्ट में पेश जवाब में उसके आरोपी हुस्ना होने की पुष्टि की।

इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिए कि वह इस मामले की पूरी जांच करें और बायोमेडिकल व अन्य जांच के आधार पर रिपोर्ट पेश करें। प्रमुख सचिव द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि जो जेल में बंद किया गया वह हत्या का आरोपी नहीं है, उसकी मौत हो चुकी है। पुलिस ने उसकी जगह एक निर्दोष को हत्या के आरोप में जेल में बंद कर दिया। यह बात सामने आने के बाद कोर्ट ने उक्त आदेश दिए।
अब हर केस में पुलिस पहले पूरी तजदिक करे

कोर्ट ने इस केस में पुलिस की इस गम्भीर लापरवाही सामने आने के बाद प्रदेश सरकार को यह निर्देश भी दिए कि वह भविष्य में किसी की भी गिरफ्तारी के पूर्व पहले उसकी पहचान के लिए बायोमेट्रिक व अन्य दस्तावेजों का पूर्ण परीक्षण करे ताकि कोई अन्य निर्दोषों को इस तरह फिर से जेल नही जाना पड़े।

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