खंडवा। मध्यप्रदेश क इंदौर संभाग केे खण्डवा शहर के बहुचर्चित सनसनीखेज विकास हत्याकांड में गुरुवार को फैसला आया। विशेष न्यायाधीश के न्यायालय ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए आठ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। वारदात 1 अप्रैल 2016 की है। आरोपियों ने सूकर चोरी के संदेह में दिनदहाड़े बीच चौराहे पर डंडों से पीट-पीटकर युवक की हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 15 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। इसमें एक नाबालिग अपचारी भी शामिल था। जिसकी सुनवाई बाल न्यायालय में हुई। प्रकरण के सभी आरोपी जिला जेल में बंद हैं। उन्हें कोर्ट नहीं लाया गया। न्यायालय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर आठ अपराधियों को आजीवन कारावास और 1500-1500 रुपए की सजा सुनाई। वहीं छह आरोपियों को बरी किया है। शासन की ओर से प्रकरण में पैरवी जिला लोक अभियोजन अधिकारी राजेंद्र सिंह भदौरिया ने की।
अदालत ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए वारदात के मुख्य आरोपित मनोज सोनकर (34) निवासी पंजाब कॉलोनी, राजदीप सोनकर (28) निवासी लोहारी नाका, आकाश सोनकर (21) निवासी गुरुनानक स्कूल के सामने लोहारी नाका, राजकलम सोनकर (27) निवासी लोहारी नाका, तेजवंश सोनकर (27) निवासी संत थामस स्कूल के पास, जगदीश (23), राजकुमार सोनकर (51) दोनों निवासी लोहारी नाका, मनोज पाटील (27) निवासी नर्मदापुरम् हाल मुकाम घासपुरा को आजीवन कारावास की सजा हुई।
प्रकरण में साक्ष्यों के अभाव में शैलेंद्र सोनकर (45), दयाशंकर सोनकर (23) विजय सोनकर (39), वीरेंद्र सोनकर (30), अजय सोनकर (45), हंसराज सोनकर (27) निवासी लोहारी नाका को रिहा किया गया है।
जिला लोक अभियोजन अधिकारी राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया 1 अप्रैल 2016 को मृतक विकास (28) निवासी चीराखदान भाई आकाश के साथ बाइक से दूधतलाई भूसा लेने जा रहा था। तभी माता चौक पर खड़े आरोपियों ने विकास को रोका और सूकर चोरी करने के संदेह पर विवाद किया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने एकजुट होकर विकास को लाठी व लोहे की रॉडों से पीटना शुरू कर दिया। स्थिति यह बनी कि बीच चौराहे पर लोगों की भीड़ के बीच आरोपियों ने विकास की डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। युवक ने जब तक दम नहीं तोड़ दिया आरोपी डंडे बरसाते रहे थे। प्रकरण में कोतवाली पुलिस ने 16 आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
बेटे की हत्या करने वाले आठ आरोपियों को सजा होने के बाद मृतक की मां निर्मला सोनकर ने कहा न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन आरोपियों को उम्रकैद नहीं फांसी की सजा होना थी। उन्होंने प्रकरण में बरी हुए लोगों से खुद व परिवार को खतरा होना बताया। निर्मलाबाई ने कहा बरी हुए लोग अभी से डराने धमकाने लगे हैं। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। साथ ही प्रकरण में हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही।
