भोपाल। मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध विद्युत क्षमता में इस वर्ष 909 मेगावाट की वृद्धि हुई है। तोमर ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में विद्युत उपलब्ध क्षमता में 1426 मेगावाट वृद्धि की योजना है। गत 31 दिसम्बर, 2020 में अभी तक की सर्वाधिक 15 हजार 425 मेगावाट माँग की पूर्ति की गयी। प्रदेश में पारेषण हानियाँ अब मात्र 2.59 प्रतिशत रह गयी हैं। यह पूरे देश में न्यूनतम हानियों में एक है। तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉकडाउन अवधि में बिजली उपभोक्ताओं की तकलीफ को महसूस कर उनके हित में अनेक निर्णय लिये हैं।  

इन निर्णयों से उपभोक्ताओं को 1000 करोड़ से अधिक की राहत मिल चुकी है। ट्रांसफार्मर, मीटर, केबल ओर कंडक्टर जैसी मुख्य सामग्री के परीक्षण के लिये भोपाल, इंदौर और जबलपुर में प्रयोगशालाएँ बनायी गयी हैं। परीक्षण के आधार पर डिफाल्टर कम्पनियों के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलवाया जा रहा है। प्रदेश के स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से निर्णय लिया गया है कि भविष्य में कुल सामग्री खरीदी में न्यूनतम 10 प्रतिशत राशि की सामग्री इनसे खरीदी जायेगी। ऊर्जा मंत्री से लेकर जूनियर इंजीनियर तक बिजली उपभोक्ताओं से चर्चा कर विभाग की कार्य-प्रणाली का फीडबैक ले रहे हैं।

  इस नवाचार में 3 माह में 4 लाख से अधिक उपभोक्ताओं से संवाद किया गया। इसमें संतुष्टि का प्रतिशत 97.15 है। समाचार-पत्रों, फेसबुक, ट्वीटर एवं अन्य सोशल मीडिया से प्राप्त शिकायतों पर भी संज्ञान लेकर कार्यवाही की जा रही है। कॉल-सेंटरों के माध्यम से अप्रैल-2020 से जनवरी-2021 तक प्राप्त सभी 26 लाख 33 हजार 856 शिकायतों को निराकृत कर दिया गया है। उपभोक्ताओं के गलत देयकों से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये 7 हजार 197 शिविर लगाये गये। इनमें 51 हजार 267 शिकायतों का निराकरण मौके पर ही किया गया। विद्युत आपूर्ति की नियमित समीक्षा कर कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे और गैर कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

  वित्तीय वर्ष 2020-21 में जनवरी-2021 तक की अवधि में ट्रांसफार्मर फेल होने की दर 8.9 प्रतिशत रही, जबकि गत वर्ष यह 9.6 प्रतिशत दर प्रति 3 माह में मीटर-रीडर की अदला-बदली की व्यवस्था की गई है। दीर्घकालीन बिजली की माँग एवं उपलब्धता के आकलन के लिये ‘द इनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ एमओयू किया गया है। विदिशा जिले के कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी का वितरण डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) स्कीम से शुरू कर दिया गया है। इस स्कीम को लागू करने से प्रदेश सरकार को भारत सरकार द्वारा 1423 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ऋण सीमा की स्वीकृति दी गयी है।  

‘आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश’ रोडमैप में विद्युत माँग की सुचारु आपूर्ति के लिये पारेषण प्रणाली के विस्तार कार्यक्रम में 4000 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर एवं टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक निविदाओं के जरिये अति उच्च-दाब उप-केन्द्रों एवं उससे संबंधित लाइनों का निर्माण शामिल किये गये हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर में 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जून-2021 तक अधिकांश काम पूरा कर लिया जायेगा। टैरिफ आधारित 2000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के जरिये परियोजना का कार्य प्रगतिरत है, जिसे वर्ष 2023 तक पूरा कर लिया जायेगा।  

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