देवास। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने धर्मप्रेमियों से कहा कि खेती करने वाले किसानों ने संस्कृति को बचाकर रखा है। किसान संपदा की कीमत जानते हैं। गांव के किसानों ने शाकाहार को बनाए रखा है। इसलिए किसान जरूरी हैं। शिक्षा, संस्कार, शाकाहार व साहित्य ही असली धन हैं।
उन्होंने जिनालयों की रक्षा और बच्चों को संस्कारवान बनाए जाने पर बल दिया। आचार्यश्री ने बताया कि खजुराहो मंदिर में नेमीनाथ की जो प्रतिमा है, उसी तरह की प्रतिमा यहां भी है। गांव के नरेंद्र पाटोदी व कैलाश पाटोदी ने बताया कि गांव के एक किसान को 60 साल पहले खेत से नेमिनाथ की प्रतिमा मिली थी। प्रतिमा को गांव के शांतिनाथ मंदिर में 1 बडी बेदी पर स्थापित किया गया।
मध्यप्रदेश के देवास जिले के सोमवार दोपहर आचार्यश्री विद्यासागर ने लोहारदा गांव से विहार किया तो पूरा गांव ही उनके साथ हो लिया। गांव की गलियों और मुख्य सडक पर रंगोली व फूल बिछाकर उनकी वंदना की गई। बैंड बाजे व भजनों की स्वर लहरियां गूंजने लगीं। आचार्यश्री और संतों के पीछे लोग नंगे पैर ही तीन किलोमीटर दूर कांटाफोड तक साथ हो लिए। कई महिलाएं भावुक हो गईं।
आचार्यश्री को आता देख लोग सडक पर लेटकर उनके आगे शीश नवाते रहे। मोटर साइकल, कार रोक कर भी लोगों ने वंदना की और आशीष लिया। रास्ते से गुजर रही बसों से लोगों ने हाथ जोडकर उनका अभिनंदन किया। कांटाफोड तक तीन किलोमीटर के पूरे रास्ते पर लोग खडे रहे। आचार्यश्री के गोदना पठार के रास्ते पर जाने पर भी सैकडों लोग पैदल उनके साथ गए। लगभग साढे आठ किलोमीटर विहार कर आचार्यश्री और संतगण गोदना पठार में ही रात्रि विश्राम किया।
लोहारदा के साथ ही रानीपुर, उदय नगर, इंदौर, भोपाल, बेंगलुरु, अहमदाबाद, रायपुर, जशपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, मुंबई सहित अन्य शहरों से भी लोग परिवार सहित पहुंचे। कई लोगों ने वीडियो कॉलिंग कर आचार्यश्री के दर्शन परिजन को कराए।
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी ने समाज की ओर से श्रीफल भेंट कर इंदौर आने की प्रार्थना की। इस दौरान संरक्षक प्रदीप सिंह कासलीवाल, राजेश लॉरेल, राजकुमार जैन, राजेंद्र काला, सुषमा कासलीवाल, पवन पाटोदी, साधना जैन, संगीता काला, मनोज सेठी व अन्य सदस्य मौजूद रहे।
