ग्वालियर। ज्योतिर्मठ एवं शारदापीठम द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि शरीर पर पहनने वाले कपडे तन को ढंकने के लिये होते हैं ना कि उघाडने के लिये। स्वामी जी ने देश में बढ रहे दुष्कर्म के मामलों को लेकर कहा कि धार्मिक शिक्षा से ही अपराध बोध की भावना जगाई जा सकती है। आजकल कपडे उघाडने का जो फैशन चला है वह भारतीय परंपराओं के विरूद्ध ही है। 

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आज यहां अपने प्रवास के दौरान पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि राममंदिर को आरएसएस और विहिप वाले मर्यादा पुरूषोत्तम राम का स्मारक बना रहे हैं। जबकि राम को भगवान के रूप मेें बाल्य काल से ही माना गया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख भगवान राम को महापुरूष बताते है और उनकी जन्म भूमि में स्मारक बनाना है कहते रहे हैं। उन्होने कहा कि सरकार बताये कि मंदिर न्यास है या स्मारक। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से रामलला जीते हैं रामलला ब्रह्म के सगुण साकार अवतार हैं जिनका कागभुशुण्डि और भगवान शिव तक ध्यान करते हैं। जिनका शयन, जागरण, भोग इत्यादि उपचारों से मंदिर में पूजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि बालक महापुरूष नहीं हो सकता। वह तो अवतारी ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनका मंदिर वही बनायेगा जो उन्हें भगवान मानता हो। 

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या के वैष्णव साधू संत घर द्वार छोडकर भगवान राम का भजन करने अयोध्या में बैठे हैं किसी महापुरूष का नहीं। रामलला हम आयेंगे मंदिर वहीं बनायेंगे का नारा लेकर सत्ता में काबिज हुई भाजपा अब मंदिर का दूसरा रूप दिखा रही है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने चार धर्मपीठ स्थापित किये अयोध्या का क्षेत्र ज्योतिषपीठ में आता है। ट्रस्ट निर्माता यह पता स्वयं कर लें कि ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य कौन हैं। सरकारी कर्मचारी जो ट्रस्टी बनाये गये हैं वह धर्मनिरपेक्ष सरकार के प्रतिनिधि हैं वह धार्मिक कार्यो के लिये वैध नहीं हैं। 

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की सत्ताधारी पार्टी गौ हत्या पर प्रतिबंध की बात करती है लेकिन सबसे ज्यादा गौ मांस का निर्यातक देश इन दिनों भारत बना हुआ है। स्मार्ट सिटी के नाम पर गायों को घरों से उदवासित कर जहां रखा गया है वहां वह भूख प्यास से दम तोड रहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत गाय और मनुष्य के साथ भारतीय संस्कृति की पहचान रहा है इसे भी नष्ट किया जा रहा है। गौचर भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। जिसपर सरकार का ध्यान नहीं हैं । सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण तो कहीं हटाये भी जा रहे हैं किंतु गौचर भूमि की चिंता सरकार को नहीं है।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार सभी कुछ बेचने पर आमादा है सरकार मुंह में राम बगल में छुरी को चरितार्थ करते हुये जयश्री राम कहकर हासिल कर गौहत्या कर विदेशों से धन हासिल कर रही है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार की शराब नीति से आज कन्याओं के साथ दुष्कर्म के मामले तेजी से बढरहे है। जन आंदोलन के बाद कडे कानून बने है लेकिन इससे अपराध नहीं रूक रहे हैं अपितु अब साक्ष्य से बचने के लिये अबोध कन्याओं की हत्या तक कर दी जा रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा से ही अपराध बोध की भावना जगाई जा सकती है। स्कूल कालेजों में स्वतंत्रता पूर्व भगवान राम का चित्र लगाया जाता था वह अब हटा दिया गया है।

सरकार राममंदिर बनाने में तो उत्सुक हैं परंतु स्कूल कालेज में धार्मिक शिक्षा देने में उसे धर्म निरपेक्ष संविधान याद आने लगता है। उन्होंने जोडा कि भगवान राम के मर्यादित चरित्र की शिक्षा से ही समाज को सुधारा जा सकता है। अगर बच्चों को भगवान राम के बारे में बताया ही नहीं जायेगा तो आगे आने वाले २०-३० वर्षों में राम मंदिर का क्या औचित्य रह जायेगा। सरकार की यह दुरंगी नीति वर्तमान और भविष्य के लिये घातक है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के फटी जींस तथा छोटे कपडे बच्चियों और महिलाओं द्वारा पहनने पर की टिप्पणी को लेकर पूछे एक प्रश्र के उत्तर में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कपडे पूरे तन को ढकनें के लिये होते हैं। उघाडने के लिये नहीं होते हैं। नकली शंकराचार्यों के बारे में पूछे एक प्रश्र के उत्तर में स्वामी जी ने कहा कि हां देश में आजकल कई नकली शंकराचार्य बने हैं वह भी मीडिया की चमक दमक से अपने आप को शंकराचार्य कहते हैं। अब मीडिया को ही उन नकली शंकराचार्यो से पूछना चाहिये एक बार एक ऐसे ही शंकराचार्य हमें द्वारका मेंं मिल गये थे वह स्वयं हमारे सामने शंकराचार्य नहीं है कहकर निकल लिये।

राम मंदिर निर्माण के बाद क्या आप वहां दर्शन करने जाओगे के बारे में पूछे जाने पर स्वामी जी ने कहा कि यह भविष्य की बात है। प्राकृतिक आपदाओं के बारे में पूछे जाने पर स्वामीजी ने कहा कि धर्म का पालन नहीं करने पर प्राकृतिक आपदाओं से तो जूझना ही पडेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में तीन चीजें जरूरी हैं एक शुद्व आहार, शुद्व जल और शुद्व वातावरण। यह तीनों नहीं होंगे तो मनुष्य प्राकृतिक आपदाओं से ग्रसित होता ही रहेगा। 

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