भोपाल। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि श्री चिन्मय सागर महाराज ने शारीरिक व्याधि के कारण शरीर त्यागने का निर्णय लिया है। उन्होंने कुछ दिन पहले गुरू आज्ञा से संल्लेखना धारण की थी। आज सुबह 7.15 बजे यम संल्लेखना धारण कर ली है। यानि आज से उन्होंने सभी प्रकार के आहार का त्याग कर दिया है। यम संल्लेखना धारण करने वाले साधु दो-चार दिन में अपना शरीर त्याग देते हैं।
मुनि चिन्मय सागर महाराज का भोपाल से गहरा वास्ता रहा है। उन्होंने यहां चातुर्मास भी किया और बीएचईएल, पंचशील नगर, नेहरू नगर में पंच कल्याणक प्रतिष्ठाएं भी कराई हैं। भोपाल के रायसेन रोड के जंगलों में महाराज ने चातुर्मास कर साधु की चतुर्थकालीन चर्या का परिचय दिया था। इस दौरान लगभग 30 से 40 गांव के लोगों ने मीट, मदिरा का त्याग किया था। मुनि चिन्मय सागर महाराज इस समय कर्नाटक के जुगुल में चातुर्मास कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कैंसर होने की जानकारी मिली। पहले देशी इलाज कराने का प्रयास किया, लेकिन बीमारी बढऩे के कारण गुरू आज्ञा से उन्होंने संल्लेखना पूर्वक शरीर त्यागने का फैसला किया। पिछले लगभग 15 दिन से उनकी संल्लेखना चल रही है। देशभर से हजारों लोग उनके दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
