इन्दौर। स्वतंत्रता दिवस पर इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा परिसर में पहली बार जैनाचार्य सुनील सागर म.सा. के सान्निध्य में ध्वजारोहण किया गया। बच्चे, बूढ़े, युवा, महिलाएं सभी जहां तिरंगे रंगों में नजर आ रहे थे, वहीं दिल में देशभक्ति की भावना हिलोरे ले रही थी। हर जवान पर भारत माता की जय और शौर्यवीर जवानों के प्रति सम्मान की भावना हिलोरे ले रही थी। देशभक्ति के तराने से पूरा राजबाड़ा परिसर 4 घंटे तक गूंजता रहा।

नेमी नगर जैन कॉलोनी से टोरी कॉर्नर होते हुए रामशाह मंदिर वहां से राजबाड़ा तक हजारों समाजबंधुओं व राष्ट्रप्रेमी नागरिकों ने भव्य तिरंगा यात्रा निकाली। हजारों हाथों में एक साथ तिरंगा नजर आ रहा थे। राजबाड़ा पर ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम हुआ। आचार्यश्री ने देश की स्वतंत्रता के साथ नागरिकों से अपने विकारों से भी स्वतंत्र होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने राष्ट्र निर्माण में हमेशा अपना योगदान दिया है। भगवान ऋषभ देव के पुत्र भरत से लेकर भगवान श्रीराम के भाई भरत और दुष्यंत-शकुन्तला के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत रखा गया है। इस देश की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर हमें हमेशा गौरव होना चाहिए। आचार्य सुनील सागर ने कहा कि भारत हमारा बड़ा घर है और हमारा घर छोटा भारत। जिस तरह घर की सुरक्षा, स्वच्छता और शांति की चिंता करते हैं, उसी तरह राष्ट्र के प्रति भी भावना होनी चाहिए। आजादी अनेक वीरों के बलिदान से मिली है। उन्होंने युवाओं से देशसेवा के लिए जुनून से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने मांस के व्यापार को बंद करने और गौहत्या पर रोक लगाने की दिशा में समाज को जागरूक होने की अपील भी की, साथ ही अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी को प्राथमिकता देने और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के रूप में सजे बच्चे
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के रूप में सजे बच्चों ने पूरे समय देशभक्ति के नारों से परिसर को पाट दिया। उनकी व्यवस्था संदीप पहाडिय़ा, सुधीर गोधा, पवन पाटोदी और दीपक पाटनी ने संभाली। राष्ट्रगान चिंतन बाकलीवाल, आयुषी बाकलीवाल, स्मिता गंगवाल, अर्पिता पटौदी और मेघना जैन ने प्रस्तुत किया। संचालन जिनेश झांझरी व अनामिका बाकलीवाल ने किया।