भोपाल। कोरोना के अभूतपूर्व संकट के बीच चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज एक वर्ष का कार्यकाल पूरा कर एक लिया। उनके मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इस अवसर पर चौहान को शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की हैं। चौहान राज्य में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने वाले नेता हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ 29 नवंबर 2005 को तत्कालीन राजनैतिक स्थितियों के चलते ग्रहण की थी। उस समय के हालातों के चलते बाबूलाल गौर ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिया था और फिर चौहान सत्तासीन हुए थे।

  इसके बाद नवंबर दिसंबर 2008 के विधानसभा चुनाव भाजपा ने चौहान के नेतृत्व में लड़ा और ऐतिहासिक विजय के बाद उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए 12 दिसंबर 2008 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। चौहान इसके बाद जनसेवा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए चलते गए और नवंबर दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने फिर विजय हासिल की और 14 दिसंबर को तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने 29 नवंबर 2015 में राज्य में सबसे अधिक समय 10 वर्ष तक मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहने के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कीर्तिमान को ध्वस्त कर इसे अपने नाम कर लिया।

नवंबर दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ और इसके चलते चौहान ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिया और तब 17 दिसंबर को कमलनाथ ने पंद्रह वर्षों बाद सत्ता में आयी कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। लेकिन कमलनाथ सरकार का पतन मात्र 15 माह में ही हो गया और कोरोना संकट के मध्यप्रदेश में दस्तक देने के बीच ही असाधारण स्थितियों में चौहान ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार 23 मार्च 2020 को शपथ ग्रहण की। चौथी बार मुख्यमंत्री के रूप में चौहान ने असाधारण परिस्थितियों का सामना किया, तो इसका श्रेय उनके सूझबूझ भरे नेतृत्व के अलावा पूर्व के लगभग तेरह वर्षों के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल के सुदीर्घ प्रशासनिक अनुभव को जाता है।  

प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने कि चौहान ने असाधारण स्थितियों के चलते ही अकेले ही मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी और वे शपथ लेने के तत्काल बाद कोरोना से निपटने के उपाय करने में जुट गए थे। पाराशर ने कहा कि उसी समय देश में लॉकडाउन लग गया। तब कोरोना के इलाज की सुविधा तो दूर, इसके जानलेवा वायरस कोविड 19 के परीक्षण संबंधी सुविधाएं, पीपीई किट और अन्य मूलभूत संसाधन तक नहीं थे। प्रशासन पर पकड़ और अनुभव के आधार पर चौहान ने दिन रात एक कर कोरोना से निपटने की तात्कालिक रणनीतियां बनाकर उन पर काम प्रारंभ किया और वहीं लोगों को जागरुक बनाने और उन्हें हिम्मत बंधाने का कार्य किया। दिनरात कार्य करने का नतीजा ही था कि चौहान भी जुलाई माह में कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए।

  पाराशर के अनुसार लेकिन यह उनकी जीवटता ही है, जो उन्होंने कोरोना के इलाज के दौरान भी अस्पताल से ही प्रशासन संभाला और लोगों के समक्ष मिसाल पेश की। आखिरकार राज्य सरकार ने कोरोना पर काफी हद तक काबू पाया और लाखों प्रवासी श्रमिकों को वापस लाया गया। उत्तरी अंचल के यहां से गुजरने वाले श्रमिकों को भोजन, दवा और अन्य सुविधाएं मुहैया करायी गयीं। पाराशर ने कहा कि चौहान ने एक वर्ष की भाजपा सरकार का शारदार तरीके से नेतृत्व कर राज्य के जनता के मन में एक बार फिर से विश्वास का भाव पैदा किया और कोरोना संकट से भी उबारा। इस दौरान अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती का भी मुकाबला किया गया। उन्होंने कहा कि आगे भी राज्य की भाजपा सरकार चौहान के नेतृत्व में जनता और प्रदेश के संपूर्ण विकास के प्रतिबद्धता के साथ आगे बढेगी। चौहान का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर उनके मंत्रियों, प्रदेश भाजपा के नेताओं और अन्य लोगों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।   

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *