इंदौर। मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप मामले की जांच के तीसरे दिन अफसरों ने अचानक इंदौर में पलासिया टीआई अजीत सिंह बैस को लाइन अटैच कर दिया है। उनके स्थान पर इंदौर में रह चुके टीआई शशिकांत चौरसिया को पदस्थ किया है। जांच डायरी देखने वाले एसआई भी कुछ समय के लिए शहर से बाहर चले गए हैं और पलासिया थाना के ही एक एसआई ने घर जाने के लिए छुट्टी मांग ली है। उसका कहना है कि जब तक हनी ट्रैप का मामला यहां चल रहा है, वह थाने से दूरी बनाकर रखेगा तो ज्यादा अच्छा है। यहां काफी दबाव है। टीआई बैस को अचानक लाइन अटैच करना कई सवाल खडे कर रहा है।
एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र का कहना है कि टीआई अजीत सिंह बैस पर एक पुराने नारकोटिक्स के मामले की जांच समय पर नहीं करने के लिए कार्रवाई की गई है। वहीं टीआई बैस का कहना है कि वह जांच तो मैंने पहले ही पूरी करवा दी थी। मुझे हटाने का कारण कुछ और हो सकता है। कहा जा रहा है कि टीआई बैस अफसरों की मंशा के अनुसार काम नहीं कर पाए। उनको जिस हिसाब से डायरी बनवाना थी, टीआई वैसी नहीं बना पा रहे थे।
शुक्रवार को भी बैस तीनों आरोपियों के मेडिकल के बाद कोर्ट में कागज पेश करने में काफी देरी कर चुके थे। पता चला है कि टीआई के लाइन जाते ही एसआई खढिया को भी इस केस से दूरी बनाने को कह दिया है और जिम्मेदारी नए टीआई शशिकांत चौरसिया व सीएसपी ज्योति उमठ को सौंपी है।
उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि ऐसी घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें शामिल नेता या अधिकारी या अन्य व्यक्ति, सभी की निष्पक्ष जांच होगी। जो भी दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई होगी। इस तरह की घटनाएं राजनीतिक और ब्यूरोक्रेसी के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को बदनाम करती हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफीज ने गृह मंत्री बाला बच्चन को पत्र लिखकर हनी ट्रैप मामले में शामिल सभी नेताओं और अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह से भाजपा की पूर्व सरकार के कुछ मंत्री, सांसद, विधायक एवं एक पूर्व मुख्यमंत्री का नाम सामने आ रहा है, उनके नाम उजागर करने के आदेश पुलिस को देने का कष्ट करें। जनता लोकतंत्र में जिन्हें चुनती है तो उनके क्या कारनामे हैं उन्हें जानने का भी अधिकार रखती है।
हनी ट्रैप में जिन पूर्व मंत्री व विधायकों के नाम आ रहे हैं, वे भाजपा से जुडे – मंदसौर के अमरपुरा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने हनी ट्रैप के मामले में कहा कि कि इसमें जिन पूर्व मंत्रियों और विधायकों के नाम सामने आ रहे हैं वे भाजपा से जुडे हुए हैं। क्योंकि, श्वेता जैन खुद भाजपा युवा मोर्चा की महामंत्री रह चुकी है और उनकी भाजपा नेताओं से काफी नजदीकी भी है
पूर्व गृह मंत्री और भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह ने इंदौर में कहा कि इस मामले में जो रसूखदार शामिल हैं, उनके नाम सार्वजनिक हों। मप्र में जब-जब कांग्रेस की सरकार बनती है, अपराधी कहने लगते हैं कि अपनी सरकार आ गई। भोपाल में तो थानों की नीलामी बोली लग रही है। सुना तो यह है कि थानों से 50 लाख रु. मंत्रियों तक पहुंच रहे हैं। भूपेन्द्र सिंह का कहना है कि प्रदेश के कलेक्टरों की पोस्टिंग इन महिलाओं के इशारे पर की जाती थी। कौनसा अधिकारी कहा तबादला किया जाएगा ये महिलाएं तय करती थी।
दोनों श्वेता भोपाल के नामी होटल की जिम में गांठती थीं बड़े लोगों से दोस्ती रू ब्लैकमेलिंग से जुड़ी श्वेता स्वप्निल जैन और श्वेता विजय जैन के बारे में सामने आया है कि भोपाल के एक पुराने नामी होटल के जिम में इनका निरंतर आना-जाना पिछले कुछ सालों से था। इसी जिम में कई सीनियर अफसर व उद्योगपति भी जाते थे। इसी जगह को दोनों महिलाओं ने जाल में फांसने का केंद्र बनाया। बताया जा रहा है कि स्वप्निल का इसी होटल की पार्किंग में कुछ दिनों पहले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के साथ विवाद हुआ था।
हनी ट्रैप गैंग का शिकार हुए निगम इंजीनियर हरभजन सिंह ने श्वेता स्वप्निल जैन के भाई को इंदौर में पाइपलाइन का ठेका दिलवाने में मदद की थी। श्वेता की भोपाल में एक फैक्टरी भी है। उसने वह फैक्टरी कैसे डाली और उसका अब तक कितने रुपयों का ट्रांजेक्शन है इसकी भी जांच की जा रही है। उधर, आरती ने भोपाल के एक आईएएस अफसर को भी हरभजन की तरह ही ब्लैकमेल करना कबूला है।
भोपाल के एक नामी क्लब में 2008 में सदस्य बने स्वप्निल जैन की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। बताया जा रहा है कि क्लब की सदस्यता के लिए पहले से बने दो सदस्यों की अनुशंसा लगती है। स्वप्निल की अनुशंसा किसने की, इसे लेकर भी चर्चा है कि उस समय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसके लिए कहा था। स्वप्निल हनी ट्रैप मामले में आरोपी श्वेता जैन (रिवेरा निवासी) का पति है।
