इंदौर। मध्यप्रदेश के हनी ट्रैप मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हमला बोला है। आज रविवार को इंदौर में सिंह ने कहा कि जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जीतू जिराती थे, तब हनी ट्रैप मामले में आरोपी श्वेता विजय जैन महामंत्री थी। उन्होंने कहा कि इस बात का पता आप लगा सकते हैं। दिग्विजय ने महाराष्ट्र के एक मंत्री के भी मामले में शामिल होने का इशारा किया। वहीं मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि महिलाओं का दुरूपयोग कर सरकारों को गिराने का खेल निश्चित रूप से लोकतंत्र की हत्या के समान है।
रविवार को दिग्विजय सिंह ने इंदौर में कहा कि मीडिया को यह पता लगाना चाहिए कि भाजपा के एक कलाकार नेता सागर में श्वेता जैन के पति विजय की दुकान का शुभारंभ करने गए थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार के एक मंत्री निलंगेकर का श्वेता जैन से क्या संबंध था। इसका भी पता लगाना चाहिए। निलंगेकर भाजयुमो महाराष्ट्र के अध्यक्ष रहे हैं।
हनी ट्रैप मामले में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने रविवार को इंदौर में कहा कि महिलाओं का दुरूपयोग कर सरकारों को गिराने का खेल निश्चित रूप से लोकतंत्र की हत्या के समान है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तर पर हनी ट्रैप की जांच की जा रही है। जनसंपर्क मंत्री ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर यह कहा है कि सरकार गिराने के लिए बीजेपी ने इसे प्रायोजित किया है। भाजपा के पूर्व मंत्री फंस चुके हैं । पूर्व मुख्यमंत्री के नाम भी है। बीजेपी ने कांग्रेस के विधायकों पर डोरे डालने का काम किया है। दो मंत्री और सात विधायकों के नाम आ रहे हैं। उन पर कोशिश की गई थी लेकिन वह बच गई। बीजेपी शक्ति परीक्षण में इसका इस्तेमाल करती। हमारे दो मंत्री और सात विधायक बच गए । आप देखिए, किस तरह से जिन माननीय पूर्व मंत्री का नाम आ रहा है। जिन्होंने पिछली सरकार में खूब कमाया है।
इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन को फांसने के लिए आरती, मोनिका के अलावा रूपा अहिरवार नाम की युवती भी इंदौर आई थी। इसकी जांच के लिए शनिवार देर रात सीएसपी ज्योति उमठ दोनों युवतियों को लेकर विजय नगर स्थित होटल इन्फिनिटी और होटल श्री पहुंचीं। 18 अगस्त को होटल श्री में तो खुद हरभजन ने रूम बुक करवाया था। 30 अगस्त को होटल इन्फिनिटी में मोनिका और आरती के साथ रूपा भी थी। मोनिका ने हर जगह फर्जी आधार कार्ड सीमा पिता राजेश सोनी निवासी जबलपुर के नाम से दिखाया था।
श्वेता स्वप्निल जैन और श्वेता विजय जैन के बारे में सामने आया है कि भोपाल के एक पुराने नामी होटल के जिम में इनका निरंतर आना-जाना पिछले कुछ सालों से हुआ। इसी जिम में कई सीनियर अफसर व उद्योगपति भी जाते थे। इसी जगह को दोनों महिलाओं ने जाल में फांसने का केंद्र बनाया। बताया जा रहा है कि स्वप्निल का इसी होटल की पार्किंग में कुछ दिनों पहले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के साथ विवाद हुआ था।
निगम इंजीनियर हरभजन सिंह ने श्वेता स्वप्निल जैन के भाई को इंदौर में पाइपलाइन का ठेका दिलवाने में मदद की थी। पुलिस इस डीलिंग को खंगाल रही है। श्वेता की भोपाल में एक फैक्टरी भी है। उसने वह फैक्टरी कैसे डाली और उसका अब तक कितने रुपयों का ट्रांजेक्शन है, इसकी भी जांच की जा रही है। उधर, आरती ने भोपाल के एक आईएएस अफसर को भी हरभजन की तरह ही ब्लैकमेल करना कबूला है।
एसएसपी और एसपी ने महिला थाने पहुंचकर आरती और मोनिका से पूछताछ की, लेकिन निगम इंजीनियर हरभजन सिंह के अलावा किसी भी नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है। दो दिन से रिमांड पर आई दोनों श्वेता जैन और बरखा सोनी से एटीएस पूछताछ कर रही थी तो कोई भी अफसर वहां नहीं जा रहा था। जैसे ही तीनों जेल गईं तो महिला थाने पर लगी पाबंदियां हटा लीं। एटीएस भी दोनों श्वेता और बरखा पर टारगेट कर रही है, क्योंकि उनसे अहम जानकारियां मिली है। मामले में अब तक निगम इंजीनियर हरभजन सिंह के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हनी ट्रैप गैंग ने कुछ और साथियों की जानकारी दी है, लेकिन पुलिस उनकी पूरी तस्दीक करने के बाद ही आरोपी बनाएगी। अभी जिन लोगों के नाम-पते सामने आए हैं, उनको ट्रेस किया जा रहा है और पुख्ता सबूत जुटाए जाएंगे। कई बार आरोपी गलत नाम बता देते हैं इसलिए जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। पुलिस के लिए सबसे बडा सवाल यह है कि गैंग में पर्दे के पीछे कौन है।
इस बीच इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम आरती दयाल की जानकारी जुटाने छतरपुर पहुंची। आरती की गिरफ्तारी के बाद से ही उसका परिवार लापता है। उधर, आरती और मोनिका का रविवार को रिमांड खत्म हो रहा है। पुलिस को हरभजन के मामले में जितनी पूछताछ करना थी, वह सब की जा चुकी है। अब पुलिस सिर्फ औपचारिकता के नाते रिमांड मांगेगी।
तीनों को भोपाल से पकडा था तो श्वेता विजय जैन का मोबाइल चालू था। उसका मोबाइल अगले दिन सुबह 9 बजे बाद बंद हुआ। अफसरों का कहना है हम जांच रहे थे कि उसे कितने फोन आते हैं। कुछ फोन की जानकारी खंगाली भी जा रही है। उधर, पुलिस जब तीनों को भोपाल से इंदौर लेकर आई तो विजयनगर के बाद गाडी का रूट बदल लिया था। उसे पाटनीपुरा होते हुए टर्न कर महिला थाने लाया गया था। पुलिस को पता चला था कि एक कार उनका पीछा कर रही है।
लग्जरी लाइफ जीने वाली श्वेता जैन, श्वेता विजय जैन और बरखा सोनी को जिला जेल की अलग-अलग बैरकों में भेज दिया गया। जिला जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी के अनुसार तीनों को बता दिया है कि यहां रौब नहीं चलेगा। शनिवार को उनके सारे कागजात बनाए गए, जिसके चलते किसी को भी मिलने की परमिशन नहीं दी गई थी। किसी के भी परिजन ने जेल में मुलाकात के लिए वक्त नहीं मांगा है।
