ग्वालियर। मध्यप्रदेश के चंबल संभाग के भिण्ड जिले में 9 माह कोख में रखने वाली मां इतनी निर्दयी नहीं हो सकती कि जन्म के बाद बेटी को मरने के लिए झाडियों में फेंक दे। अपने कलेजे के टुकडे को कौन मरने के लिए फेंकता है। दाने बाबा का पुरा रतवा रोड किनारे झाडियों में मिली नवजात बच्ची काश, बोल पाती तो अपनी मां से पूछती कि मां आखिर मेरा क्या कसूर था। जो मुझे मरने के लिए छोड़ दिया।
बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान के बाद भी बेटियों को लेकर भिण्ड जिले के लोगों की सोच बदली नहीं है। स्थिति यह है पूरे प्रदेश में अभी भिण्ड में लिंगानुपात अन्य जिलों की अपेक्षा कम है। जिला में एक हजार लड़कों पर 839 लड़कियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बडा कारण जागरूकता की कमी है। बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान भिण्ड जिले में कागजों में सीमित रह गया है। अगर लोगों को गांव-गांव जाकर अभी भी जागरुक नहीं किया गया तो भिण्ड जिले में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो सकती है।
भिण्ड जिले के गोहद विकास खण्ड के मौ कस्बे के रतवा रोड से निकल रहे राहगीर केदार सिंह कुशवाह को झाडियों से एक नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने झाडियों के पास जाकर देखा तो एक नवजात बच्ची गुलाबी कपडे मे लिपटी हुई पडी थी। जिसके बाद राहगीर केदार सिंह ने घटना की जानकारी मोबाइल पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेखा कुशवाह को दी। सूचना मिलने के बाद रेखा अन्य ग्रामीणों के साथ घटना स्थल पर पहुंची। उसके बाद ग्रामीणों ने इस घटना की जानकारी पुलिस और 100 डायल को सूचना दी गई। मौ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को अस्पताल लेकर आई। यहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार किया, जिसके बाद उसे ग्वालियर के लिए रैफर कर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रेखा कुशवाह ने बताया कि बच्ची को देखकर लगता है कि घटना के 3 घंटे पहले बच्ची को जन्म हुआ होगा। साथ ही जन्म के तुरंत बाद उसको झाडियों में फेंक दिया गया था। उसे जगह-जगह चींटियों ने काट लिया है। गंदगी में पडी होने से शरीर और आंखों में इंफेक्शन फैल गया है। गंभीर अवस्था में बच्ची को ग्वालियर भेज दिया गया है।
भिण्ड जिले के मौ थाने के टीआई राजकुमार शर्मा ने आज यहां बताया कि लावारिस मिली मासूम बच्ची का मौ अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराए जाने के बाद ग्वालियर भेज दिया है। बच्ची ने किसके घर में जन्म लिया है इसका पता लगाया जा रहा है। फिलहाल अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
