छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी ज़िले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। यहां 13 अगस्त को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें दो बड़े इनामी नक्सली मारे गए। इन दोनों पर कुल 1.16 करोड़ रुपये का इनाम था।
मारे गए नक्सलियों में शामिल हैं:
1. विजय रेड्डी – उस पर 90 लाख रुपये का इनाम था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य था और छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना पुलिस को लंबे समय से वांछित था।
2. लोकेश सलामे – उस पर 26 लाख रुपये का इनाम था। वह राजनांदगांव-कांकेर बॉर्डर (RKB) डिवीजन का सचिव था।
मुठभेड़ कैसे हुई?
ये मुठभेड़ 13 अगस्त की शाम करीब 5 बजे शुरू हुई और लगभग 3 घंटे तक चली। सुरक्षा बलों में शामिल थे, छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 27वीं बटालियन। घने जंगलों में चलाए गए ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने पहले गोलीबारी शुरू की, जिसका सुरक्षा बलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। मुठभेड़ के बाद घटनास्थल की तलाशी में दो राइफलें (एक इंसास और एक .303), वॉकी-टॉकी, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, और अन्य नक्सली सामग्री बरामद की गई।
मारे गए नक्सली कौन थे?
विजय रेड्डी:
उम्र: लगभग 55 साल
निवासी: बलरामपुरम मंडल, आत्माकुर (आंध्र प्रदेश)
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की पुलिस ने उस पर इनाम घोषित किया था।
माना जाता है कि वह 2009 में राजनांदगांव हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें एसपी वीके चौबे समेत 29 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। वह तीन राज्यों में कई नागरिकों की हत्या, पुलिस पर हमले और संगठन संचालन में शामिल रहा है।
लोकेश सलामे:
उम्र: लगभग 35 साल
वह जनवरी 2025 से RKB डिवीजन का नेतृत्व कर रहा था। उसके खिलाफ कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं थी, लेकिन वह इलाके के स्थानीय कार्यकर्ताओं को संगठित करने और हिंसक गतिविधियों में शामिल था।
अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी
पिछले एक साल में इस ज़िले में नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलताएं मिली हैं जिनमें 2 बड़े नक्सली नेता मारे गए (विजय रेड्डी और लोकेश सलामे)। 1 DKSZC सदस्य और 1 DVCM सचिव मारा गया। 1 DVCM गिरफ्तार, 1 DVCM ने आत्मसमर्पण किया। 4 ACM ने भी आत्मसमर्पण किया। 12 से ज़्यादा नक्सली कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए।
ऑपरेशन ‘प्रयास’ और आत्मसमर्पण की अपील
छत्तीसगढ़ पुलिस और ITBP ने अब बाकी बचे नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील की है। ऑपरेशन ‘प्रयास’ के तहत सुरक्षाबल नक्सलियों के परिवारों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं जिससे क्षेत्र में शांति और विकास को बढ़ावा मिले।
