सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है और जल्द ही कड़ाके की ठंड का असर बढ़ने वाला है। ऐसे समय में सूर्यभेदन प्राणायाम ठंड से राहत पाने का एक प्राकृतिक उपाय बन सकता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्यभेदन का अर्थ है – ‘सूर्य’ यानी सूर्य और पिंगला नाड़ी से, और ‘भेदन’ का मतलब सक्रिय करना।
इस प्राणायाम में दाहिनी नासिका से सांस लेकर पिंगला नाड़ी में प्राण शक्ति जागृत की जाती है, जिससे शरीर में गर्मी पैदा होती है और ठंड कम महसूस होती है।हर बार दाहिनी नासिका से सांस लें और बाईं से छोड़ें। यही इसका मूल मंत्र है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह त्रिदोष असंतुलन से होने वाले रोगों को नष्ट करता है और साइनस को साफ रखता है। ठंड में शरीर सुस्त पड़ जाता है, जिससे इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर की आंतरिक अग्नि को प्रज्वलित कर बॉडी हीट बढ़ाता है, जिससे सर्दी-जुकाम, कफ, दमा जैसी समस्याएं दूर रहती हैं। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और मानसिक स्पष्टता लाता है।
आयुष मंत्रालय की योग गाइडलाइंस में इसे सर्दियों का विशेष प्राणायाम बताया गया है, जो वात-कफ विकारों को संतुलित कर तनाव मुक्त जीवन देता है। नियमित अभ्यास से पाचन मजबूत होता है, चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं और एनर्जी भी मिलती है।
मंत्रालय सूर्यभेदन प्राणायाम करने की सही विधि और लाभ भी बताता है। शांत जगह पर पद्मासन, सुखासन या वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। रीढ़ सीधी और आंखें बंद रखें। दाहिने हाथ से नासाग्र मुद्रा बनाएं, अंगूठा दाहिनी नासिका पर, अनामिका बाईं पर।
बाईं नासिका बंद कर दाहिनी से गहरी सांस लें। दोनों बंद कर कुंभक करें फिर दाहिनी बंद कर बाईं से धीरे सांस छोड़ें। इस अभ्यास को 5-10 बार दोहराएं। सुबह खाली पेट या शाम को करें। सूर्यभेदन प्राणायाम के अभ्यास से एक नहीं, कई लाभ मिलते हैं। यह ठंड में बॉडी हीट बढ़ाकर कंपकंपी दूर कर गर्माहट लाता है।
सर्दी-जुकाम, कफ, अस्थमा, साइनस, निमोनिया से राहत मिलती है। तनाव घटता तो एकाग्रता और स्मृति बढ़ती है। पाचन अग्नि प्रबल, अपच-वात दूर होता है। इससे रक्त शुद्ध, ब्लड प्रेशर नियंत्रित, इम्यूनिटी मजबूत होती है और थायरॉइड, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज की समस्या में भी राहत मिलती है और त्वचा निखरती है।
