बागपत जिले में खाप चौधरियों की एक बैठक हुई, जिसमें समाज में फैल रही बुराइयों को रोकने के लिए कई फैसलों पर चर्चा की गई। इस बैठक में खासतौर पर बच्चों की परवरिश, युवाओं की आदतों और शादियों में खर्च को लेकर बातें सामने आईं। बैठक में यह बात रखी गई कि लड़के और लड़कियां हॉफ पैंट पहनकर घर से बाहर न निकलें। खाप चौधरियों का कहना है कि यह पहनावा भारतीय संस्कृति के खिलाफ है और इससे बच्चों के व्यवहार पर गलत असर पड़ता है। थम्बा चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आजकल का पहनावा, जैसे हॉफ पैंट, बच्चों की सोच और आदतों को बिगाड़ रहा है। हमें अपनी संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए।

18 साल से कम बच्चों को स्मार्टफोन न देने का सुझाव
बैठक में स्मार्टफोन को लेकर भी चिंता जताई गई। कहा गया कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथ में मोबाइल नहीं होना चाहिए। सुझाव दिया गया कि स्कूलों में केवल शिक्षक की देख-रेख में स्मार्ट पढ़ाई होनी चाहिए, ताकि मोबाइल का गलत उपयोग न हो।

मोबाइल से होने वाले बदलावों पर चिंता
नई पीढ़ी में इंटरनेट और मोबाइल की वजह से व्यवहार में बदलाव को लेकर बुजुर्गों ने चिंता जताई। कुछ दिन पहले राजस्थान के जालोर में भी लड़कियों के कपड़ों को लेकर ऐसा ही निर्णय लिया गया था। उसी के बाद इस विषय पर बागपत में भी चर्चा बढ़ी।

शादियों में फिजूल खर्च पर रोक लगाने का प्रस्ताव
खाप चौधरी सुरेंद्र सिंह ने शादियों में होने वाले जरूरत से ज्यादा खर्च पर भी बात रखी। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि समाज को इस बारे में जागरूक किया जाए और कोशिश की जाए कि  मैरिज होम या बड़े महंगे स्थानों में शादी न हो। विवाह अपने घर या ग्रह स्थान पर ही सादगी से किया जाए। फिजूल खर्च रोककर समाज को सही दिशा दी जाए।

युवाओं की राय भी ली जाएगी
हालांकि बैठक में बातें रखी गईं, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। खाप चौधरी सुभाष सिंह ने कहा, यह सिर्फ चर्चा थी। अब युवाओं की भी राय ली जाएगी और फिर पंचायत में मिलकर अंतिम निर्णय होगा।

समाज को जागरूक करने की योजना
बुजुर्ग खाप चौधरी अब समाज के हर घर तक जाकर नई पीढ़ी को समझाने और सही दिशा में आगे बढ़ाने की योजना बनाएंगे। उनका मानना है कि समाज तभी बदलेगा जब परिवार खुद बदलने की कोशिश करेगा।