मध्य प्रदेश के गुना जिले में 14 वर्षीय अभ्युदय जैन की मौत के मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। ग्वालियर हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने उसकी मां अलका जैन को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ठोस साक्ष्यों के अभाव में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामले की शुरुआत 14 फरवरी 2025 को हुई थी, जब अभ्युदय जैन का शव उसके घर के बाथरूम में मिला। अगले दिन पोस्टमार्टम कराया गया और 22 फरवरी को कोतवाली थाना गुना में मामला दर्ज हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मां अलका जैन को आरोपी माना।
इसके बाद 8 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि, 17 जून को उन्हें जमानत मिल गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब हाई कोर्ट के इस फैसले ने उन्हें पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया है।
लगभग एक वर्ष पहले गुना में 14 वर्ष के अभ्युदय जैन की हत्या के आरोप में गुना के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने उसकी मां अलका जैन को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। उनका परिवार वालो ने अलका को निर्दोष बताया। आईजी अरविन्द सक्सेना और डीआईजी अमित सांघी ने घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की जांच में अलका को निर्दोष बताया, लेकिन गुना के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पता नहीं क्यों गुना से हटने के बाद भी षडयंत्र रचते रहे। गुना जिला न्यायालय ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज करते हुए अलका के खिलाफ हत्या का प्रकरण जारी रखने के आदेश दिए। गुना कोर्ट में सुनवाई तेज हुई और बयान भी होने लगे। तब अलका ने ग्वालियर हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की।
आखिर आज न्याय मिल गया
अलका को आज ग्वालियर हाईकोर्ट से न्याय मिल गया। जस्टिस श्री मिलिन्द रमेश फडके जी ने अपने 19 पेज के एतिहासिक फैसले में अलका को पूरी तरह निर्दोष साबित कर दिया है। बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस, शासकीय अधिवक्ता और अलका के वकील तीनों पक्षों ने अलका को निर्दोष बताया। एक निर्दोष मां पर उसके अपने ही दिल के टुकड़े (बेटे) की हत्या का आरोप आखिर गुना के तत्कालीन एसपी ने क्यों लगाया, हम आज तक समझ नहीं पाये ।
ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला
